Prajanan प्रजनन -हेल्दी प्रेगनेंसी, हेल्दी बेबी , हेल्थी मदरहूड के लिए पंचकर्म

आज का विषय है हेल्दी प्रेगनेंसी, हेल्दी बेबी , हेल्थी मदरहूड

हेल्दी प्रेगनेंसी, हेल्दी बेबी , हेल्थी मदरहूड के लिए हमें क्या करना चाहिए?

इसके लिए एक बहुत ही अच्छा उपाय आयुर्वेद में बताया गया है। – पंचकर्म और योगा

पंचकर्म और योगा से हम हेल्दी प्रेगनेंसी, हेल्दी बेबी , हेल्थी मदरहूड हासिल कर सकते है।

पंचकर्म और योगा से हमे कैसे फायदा होगा?

पंचकर्म –

हम हर रोज हमारे घर की साफ सफाई करते है फिर भी साल में एक बार हम पूरे घर की फिरसे अच्छे से साफ सफाई करते है। कयू ? क्योंकि अगर घर के कोनो में जमी गंदगी भी निकल जाए तो कीटाणु नहीं होगे और कीटाणु नही तो बीमारियां नही। घर मे सब स्वस्थ रहेंगे। उसी तरह साल में एक बार अगर हम पंचकर्म से शरीर की शुद्धि करे तो तो साल भर शरीर में जमा हुए टॉक्सिंस(गंदगी) शरीर से  निकल जाती है और हम निरोगी रहते है।और निरोगी शरीर से ही हेल्दी प्रेगनेंसी, हेल्दी बेबी , हेल्थी मदरहूड हासिल होती है |

योगा –

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और स्ट्रेस हर बीमारी का महत्वपूर्ण कारण है। योगा एक ऐसा व्यायाम है कि जिसमें हम बहुत ही संथ गती से श्वास अंदर लेते है और श्वास बाहर निकालते है। इस वजह से अपना मन और शरीर शांत हो जाता है और हम निरोगी रहते हैयोगा करने से शरीर और मन का तनाव भी निकल जाता है। योगा के साथ मुद्रा करे और मंत्र कहे तो हमारे शरीर मे सकारात्मक ऊर्जा बनती है। वह भी हमे निरोगी रखने मे मदद करती है। और संतुलित शरीर और मन में ही हेल्दी प्रेगनेंसी, हेल्दी बेबी , हेल्थी मदरहूड पाई जा सकती है।

जीवनशैली में परिवर्तन

आजकल 70 टक्के बीमारियां अपने गलत जीवनशैली की वजह से होती है जैसे वबेवक्त खाना, पीना, सोना, उठाना। अगर हम जीवनशैली मे बदलाव ना करे तो आज हम निरोगी है पर बार-बार बीमार होते रहेंगे ।   

इसलिए आपको अगर हेल्दी प्रेगनेंसी, हेल्थी बेबी, हेल्थी मदारहूड चाहिए तो पहले खुद को और अपने साठीदार को निरोगी बनाए।

यह सब चीजो को ध्यान में रखकर हमारे आरोग्यम आयुर्वेदिक क्लीनिक मे हमने एक प्रोग्राम बनाया है। उसका नाम है प्रजनन।

प्रजनन

इस प्रोग्राम मे हमने पंचकर्म, योगा, मुद्रा, मंत्र, जीवनशैली मे बदलाव और विविध दवाइयां इस सब का अंतर्भाव किया है। इसकी वजह से आपका शरीर और मन संतुलित और निरोगी रहता है।

यह प्रोग्राम 15 दिन से 1 महीने का होता है। अगर आपको अच्छी स्वस्थ प्रेगनेंसी चाहिए तो प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले (नॅच्युरल प्रेगनेंसी हो, या IUI/ IVF  हो ) उससे पहले आप यह आयुर्वेद का सुंदर वरदान पंचकर्म इसका जरूर उपयोग कीजिए । प्रजनन प्रोग्राम का लाभ उठाए।

धन्यवाद.

जानिए बस्ती पंचकर्म के पीछेका शास्त्रीय विचार क्या है? Blog – 59

नमस्कार

पिछले ब्लॉग मे हमने पंचकर्म, उसके प्रकार वमन और विरेचन कर्म इनके बारे में अधिक जानकारी ली थी | इस ब्लॉग मे हम बस्ती कर्म के बारे मे जानकारी लेंगे |

लोगों को बस्ती कर्म याने पेट साफ करने वाली दवा इतना ही पता होता है| पेट साफ हो गया और अच्छा लगने लगता है।

कया बस्ती कर्म का इतना ही उपयोग है ? – नही | बस्ती चिकित्सा के पीछे एक बहुत महत्वपूर्ण विचार/ शास्त्र है।

आयुर्वेद में बस्ती चिकित्सा को “आधी चिकित्सा” कहा जाता है।

मतलब रुग्ण को हम सिर्फ बस्ती चिकित्सा देकर 50% ठीक कर सकते हैं | और बाकी के 50% गुण के लिए बाकी सब पंचकर्म, दवाई, जीवनशैली में बदलाव और व्यायाम की जरूरत पड़ती है। याने रुग्ण को 50% गुण सिर्फ बस्ती चिकित्सा से ही मिल जाता है।

आयुर्वेदने इसलिए बस्ती चिकित्सा को बहुत महत्वपूर्ण माना है। तो उसके पीछे का शास्त्र भी बहुत महत्वपूर्ण होगा।

चलो इस ब्लॉग में हम जानते हैं कि बस्ती कर्म के पीछे क्या शास्त्रीय विचार है?

उससे पहले हमें अपने शरीर के पचनमार्ग के बारे में थोड़ी जानकारी होना आवश्यक है।

हम जो अन्न खाते है उसपर पचन संस्कार मुंह में शुरू हो जाता है| फिर अन्न जैसे नीचे नीचे जाता है वैसे पेट, जठर, अग्न्याशय याने (stomach, liver, Pancrease) से पाचक स्त्राव उसमे मिलते है। फिर वह अन्न नीचे छोटे और बड़े आंतडो में जाता है| छोटे और बड़े आंतडोमे उस अन्न से पोषक अंशको खून में शोष लिया जाता है।

मतलब इधर एक बात पर गौर किजिए कि जो पोषक अंश खून में शोष लिया जाता है वह आतडो से होता है। और जब यह पोषक अंश खून में शोष लिया जाता है उसके बाद वह पूरे शरीर में जाकर शरीर का पोषन होता है और हमारे शरीर को ताकत मिलती है। इसी तत्व का फायदा बस्ती चिकित्सामें उन जमाने में ऋषियों ने किया।

कैसे?

दवा को ३ घंटे के पचन मार्ग से जानेकी आवश्यकता नहीं होती। इसलिए उन विद्वान ऋषियों ने बस्ती चिकित्साकी निर्मिती की ।बस्ती चिकित्सा द्वारा दवाईयां सिधा आंतडो में जाती है और मिनटोमें आंतडो से रक्त मे शोषण होती है और अपना काम शुरू कर देती है।

मतलब उन दिनो मे बस्ती चिकित्सा यह इमरजेंसी सर्विस याने अत्यायिक चिकित्सा होती थी।

उन ऋषियों और उनकी विद्वता को सलाम।

आप आश्चर्यचकित हो गए ना जानकर कि बस्ती चिकित्सा कितनी महत्वपूर्ण है और उसके पीछे इतना गहन शास्त्र है |

आयुर्वेद ऐसे अनेक सिद्धांतो से परिपूर्ण है क्युकि आयुर्वेद यह एक शास्त्र है। इसलिए उसके सिद्धांत समझ न आए तो आयुर्वेद के बारे में नाम रखने से पहले उस शास्त्र का अभ्यास करना चाहिए|

क्युकि आयुर्वेद के सिद्धांत सिद्ध करके अंत हुए हैं, याने यह तत्व सिद्ध हुए है और उसके आगे सिद्ध करने जैसा कुछ नही है। इसलिए आयुर्वेद के सिद्धांत इतने सालो बाद आज भी सच है | इसलिए अपने शास्त्र प्रति आदर रखो।

आयुर्वेद के सिद्धांत के बारे मे हम आनेवाले ब्लॉगस् मे लिखते रहेंगे|

अगले ब्लॉगमे हम बस्ती के प्रकार और बस्ती के बारे मे और अधिक जानकारी लेंगे|

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Science behind Basti Panchakarma – Blog – 58

Welcome to Treasures of Ayurveda Blog.

In last Blog we learnt about panchakarma, its various types – Vaman and Virechan in detail. In today’s Blog we will learn about BASTI CHIKITSA.

Generally , Basti is perceived as something which clears ones bowels.

Is that the sole role of BASTI ? No.

Do you think ayurveda will give so much of importance to a therapy whose role is to only clear your bowels.

Ofcourse not.

Basti has a well established science behind it.

So in today’s blog we are going to learn

What is the science behind BASTI CHIKITSA?

Ayurveda considers basti as “half treatment”.

Means if a patient come to us for treatment , then with only basti treatment we can cure patient upto 50%. and for the remaining 50% result we need the help other karma’s, medicine, diet, exercise.

Such is the importance given by  Ayurveda to  basti treatment.

So before understanding the science behind the basti treatment we should have a glimpse at our digestive system.

When we eat food , it’s digestion starts from the mouth. As the food descends downwards into the stomach , it gets mixed with different gastric juices and liver enzymes. The main function of absorption of nutrition from food takes place in the intestine- large intestine as well as small intestine. Absorbed nutrients from the food along with blood goes to the whole body and thus our body gets nourishment.

So the important fact to remember here is – Absorption takes place in the intestine. This principle was used by our hrishi’s in formulating the Basti Chikitsa.

Food needs a three hour digestion process so that it gets converted to a form through which body can absorb nutrients. But a medicine doesn’t required 3 hours digestion process to be absorbed into the blood. So to cut short this 3 hours process and reach intestine directly our Hrishis formulated BASTI Chikitsa,

Medicines in the form of kadhas or ghee were used to insert into the large intestine with the help of a BASTI YANTRA so that medicine gets absorbed into the blood within seconds.And thus a medical emergency treatment came into existance in those ancient days….hence BASTI chikitsa had such inportance.

You must be astonished to know the science behind basti treatment.

Our hrishi’s need to be saluted for discovering such Novel, emergency treatment modality called Basti Chikitsa in those days.

All Panchakarmas and medicine of Ayurveda have science behind it. It is called a Siddhant.

Siddhant – Siddha + Anth

Siddha means something which is proven and anth means it is the end. Means it is the truth which is proven and its not going to change. All the Siddhant told in ayurveda are very unique and are truths of Life.

If we dont understand these Siddhants then it might be because we have not made efforts to find details , study it or we are not intelligent to understand it. But saying that Ayurveda is not science , is all bullshit . We should study, investigate and learn the science first.

Ayurveda is time-tested science which is true even today. So we should pay respect to Ayurveda and start learning it. I am playing my small role in propogating  ayurveda by telling science behind Ayurveda, you do yours.

In next blog we will learn about basti karma in details like types, advantages etc.

Do follow our blog treasures of Ayurveda.

Stay Healthy Stay Blessed.

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बस्ती पंचकर्मामागील शास्त्रीय विचार काय आहे ? – Blog – 57

मागील ब्लॉग मध्ये आपण पंचकर्म, त्याचे प्रकार आणि वमन, विरेचन या कर्माबद्दल माहिती घेतली. आणि आजच्या ब्लॉग मध्ये आपण बस्ती चिकित्सा बद्दल माहिती घेणार आहोत.

बस्ती चिकित्सा म्हणजे काय ?

बस्ती चिकित्सा म्हणजे सामान्यपणे एनीमा म्हणजे पोट साफ करणारे औषध असं मानलं जात कारण पोट साफ झालं की बरं वाटतं.

पण तसे नाही आहे .

बस्ती चिकित्सेमागे खूप महत्वपूर्ण शास्त्रीय विचार आहे.

आयुर्वेदाने बस्ती चिकित्सेला “अर्धी चिकित्सा” मानली आहे. म्हणजे एखाद्या रुग्णाला बरं करण्यासाठी बस्ती चिकित्सा दिली तर ५० टक्के गुण फक्त बस्ती चिकित्सेने मिळतो आणि उरलेल्या ५० टक्के गुणासाठी इतर पंचकर्म, औषध, आहार, व्यायाम यांची योजना करावी लागते.

जर आयुर्वेदाने बस्ती चिकित्सेला इतके महत्व दिले आहे तर त्यामागील शास्त्रीय विचार अत्यंत महत्वपूर्ण असणार.

चला तर मग जाणून घेऊया बस्ती कर्मामागील शास्त्रीय विचार.

त्यासाठी पहिले आपल्याला आपल्या पचन संस्थेबद्दल थोडीशी माहिती करून घ्यावी लागणार. आहे.

आपण जे अन्न खातो त्याचे पचन तोंडात सुरू होते. त्यानंतर ते अन्न खाली पोटात म्हणजे Stomach आणि जठर म्हणजे Liver कडे जाते , या अवयवांमधून विविध स्त्राव अन्नात मिसळले जातात आणि जेव्हा ते अन्न आतड्यामध्ये जाते तेव्हा त्यातून पोषक अंश रक्तात शोषून घेतले जातात आणि मग ते पोषक अंश रक्ताद्वारे पूर्ण शरीरात जाऊन शरीराला पोषण देतात.

तर इथे महत्वाची गोष्ट लक्षात ठेवण्याची ही आहे की रक्तात जो पोषक अंश आतड्या मधून शोषला जातो . ह्याच ज्ञानाचा आयुर्वेदाने सुंदररित्या बस्ती चिकित्सेत उपयोग केलेला आहे.  त्या ऋषींना शतश: नमन. 

औषध रक्तात लगेच शोषले गेले पाहिजे.औषधाला अन्न मार्गातून जाण्याची काही आवश्यकता नसते, तीन तासांचा वेळ वाचतो. त्यामुळे आयुर्वेदात बस्ती चिकित्सेद्वारे औषध, काढे, तूप हे आतड्यामध्ये मोठ्या प्रमाणात सोडली जातात. आतड्याचे काम आहे औषध लगेच रक्तात शोषून घेणे आणि त्यामुळे सेकंदात औषध रक्तात जाऊन त्याचे काम सुरू करते .तर बस्ती म्हणजे फक्त पोट साफ करणारे औषध नाही, तर

बस्ती म्हणजे आत्यायिक चिकित्सा.

म्हणजे बस्ती चिकित्सा ही जुन्या काळाची Emergency Services म्हणजे अत्यायिक चिकित्सा होती असे आपण म्हणू शकतो. से आज काल आपण नसेमधून मधून रक्तात लगेच औषध सोडतो तसं त्या काळी बस्ती चिकित्सेद्वारे औषध आतडयात सोडून सेकंदात ते रक्तात शोषले जात असे.

बस्ती चिकित्सा म्हणजे Emergency Services.

आश्चर्यचकित झाला ना .. जाणून.. कि बस्ती चिकित्सेमागे आयुर्वेदाचा इतका मोठा गहण विचार आहे.

आयुर्वेद हे एक शास्त्र आहे हे लक्षात घ्या , आपल्या बुद्धीला त्याच्या मागचे शास्त्र , सिद्धांत समजत नसतील तर त्याला नावे ठेवू नका किंवा ते चुकीच आहे असे मानू नका. त्याच्यापेक्षा त्याच्या मागे काय शास्त्रीय विचार असेल ह्याच अभ्यास करून शोध घ्या .

आपल्या आयुर्वेद शास्त्राबद्दल आदर बाळगा. कारण

आयुर्वेदिक शास्त्राचा प्रत्येक सिद्धांत = सिद्ध + अंत म्हणजे ते सत्य आहे आणि ते सत्य सिद्ध केलेले आहे आणि त्याच्या पुढे सिद्ध करण्यासाठी काही उरले नाही …..अंत आहे. त्याच्यापुढे त्याच्यात बदल नाही ह्याला सिद्धांत म्हणतात.

हा ब्लॉग जास्तीत जास्त फॉरवर्ड करा म्हणजे आयुर्वेदाच्या मागचे सिद्धांत लोकांना कळतील. हा ब्लॉग जास्तीत जास्त शेअर करा, तुमचे कमेंट कळवा आणि पुढील ब्लॉग मध्ये आपण बस्तीचीचे विविध प्रकार त्याचे उपयोग यांच्याबद्दल माहिती करून घेऊया.

Stay Healthy ,Stay blessed.

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पंचकर्म क्या है ? (Hindi Blog no – ) Blog – 55

पंचकर्म पंचकर्म पंचकर्म…. आजकल सब जगह एक ही नाम है पंचकर्म

कोई पंचकर्म का मतलब मसाज समझते हैं तो कोई पंचकर्म को उल्टी और जुलाबवाली दवा कहते हैं।

तो आखिर सही अर्थ में पंचकर्म है क्या ?

चलो जानते हैं आज के हमारे ब्लॉग में पंचकर्म क्या है?

पंचकर्म

पंच याने ५ और कर्म याने क्रिया।

पंचकर्म याने ऐसी पांच क्रियाए जिन से शरीर शुद्धि होती है और शरीर को ताकत मिलती है |

  • शरीर शुद्धि पंचकर्म मे समावेश होता है।

१. वमन
२. विरेचन
३. बस्ती
४. नस्य
५. रक्तमोक्षण

  • शरीर को ताकत देनेवाले पंचकर्म में समावेश होता है।
    शक्तिवर्धक पंचकर्म

    १. स्नेहन
    २. स्वेदन
    ३. शिरोधारा
    ४. नस्य
    ५. बस्ती

नस्य और बस्ती इन कर्मोका शरीरशुद्धी पंचकर्म और शक्तिवर्धक पंचकर्म इन दोनों मे समावेश होता है क्युकि जिस प्रकार का द्रव्य इन कर्मों में इस्तेमाल होता है (जैसे जिस प्रकार का तेल, घी, काढ़ा ) उस तरह का शरीर पर असर होता है जैसे शक्तिवर्धक द्रव्य का इस्तेमाल बस्ती या नस्य मे किया तो शक्तिवर्धन होता है और अगर शरीरशुद्धी द्रव्य का उपयोग किया तो नस्य और बस्ती से शरीर शुद्धी होती है , इसलिए इन कर्मो का समावेश दोनों में होता है।

पहले शरीरशुद्धि पंचकर्म के बारे में जानते है |

शरीर शुद्धी पंचकर्म –

वमन और विरेचन

कालावधी –

वमन और विरेचन इन पंचकर्म क्रियाओं को १५ दिन का कालावधी लगता है।

शास्त्र –

वमन और विरेचन इन शरीर शुद्धि कर्मोमे शरीर की पचनशक्ती को शरीरशुद्धी के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसलिए जिंदा रहने के लिए आवश्यक हो उतना ही अन्न खाना यह मंत्र हमें कम से कम १५ दिन अपनाना पड़ता है। शरीरशुद्धि क्रिया में पचन शक्ति को पचन कर्म से आराम देकर उस पचनशक्ती को शरीर शुद्धि के लिए इस्तेमाल करना यह इसके पीछे का हेतु होता है।


विधी– वमन और विरेचन पंचकर्म को ४ विभागों में विभाजित किया जाता है।
१. स्नेहपान
२. प्रधान कर्म
३. संसर्जन क्रम
४. अपुनर्भव चिकित्सा

१. स्नेहपान

इस विधी मे बढ़ते प्रमाण मे औषधी घी का सेवन करना होता है।

यह विधि ५ से ६ दिन चलती है।

इसमें सुबह खाली पेट औषधी घी का सेवन करना होता है और औषधि घी बढ़ते हुए प्रमाण में दिया जाता है, जैसे पहले दिन ४ चम्मच, दुसरे दिन ६ चम्मच फिर ८, १२, १६ चम्मच इस प्रमाण में औषधि घी को बढ़ाया जाता है। घी खाने के बाद गरम पानी पीते रहकर जब घी की डकार आना बंद हो जाए (मतलब घी हजम हो गया है )उसके बाद भूख लगे तब मूंग दाल की खिचड़ी और प्यास लगे तब गरम पानी पीना होता है।

इस औषधि घी के सेवन से हमारे शरीर का आम (टॉक्सिंस) पतला होता हैं।

उस के बाद स्नेहन यानी मसाज और स्वेदन याने स्टीमबाथ दी जाती है|

स्नेहन और स्वेदन – यहा स्नेहन और स्वेदन का उद्देश शरीर का आम (टॉक्सिक्स) शरीर के मध्य मे लाना होता है| जैसे हम घर की साफ सफाई करने के बाद नीचे गिरा हुआ कचरा इकट्ठा करके फिर बाहर फेकते हैं उसी तरह जब स्नेहपान से शरीर का आम पतला होता है (टॉक्सिन लिक्विफाय होते है) तब स्नेहन और स्वेदन से वह आम शरीर के शाखाओं से मध्य में लाया जाता हैं।

२. प्रधान कर्म

स्नेहन और स्वेदन कर्म के बाद आम को (टॉक्सिक्स) उपर के मार्ग से याने उल्टी द्वारा निकाला जाए तो उसे वमन कर्म कहते हैं और अगर जुलाब कराकर नीचे के मार्ग से निकाला जाए तो उसे विरेचन कर्म कहते हैं।

३. संसर्जन क्रम

यह १० दिन से लेकर १५ दिन तक करने का विधि है |

वमन और विरेचन इन प्रधान कर्मो के दौरान सिर्फ मूंग दाल और चावल खाना होता है| मतलब यह विधी उपवास के समान ही हो जाता है| इसलिए जैसे कोई भी उपवास छोड़ते वक्त हम शुरवात में हलके पदार्थ खाना शुरू करते हैं फिर धिरे धिरे हजम करने में भारी पदार्थ खाना शुरु करते है वैसे ही वमन और विरेचन इन प्रधान कर्मो के बाद हम पहले भोजन मे हल्के पदार्थ जैसे लिक्विड याने दाल का पानी, चावल का पानी, चावल और फिर खिचड़ी ऐसे धीरे-धीरे नॉर्मल डाइइट पर आते हैं| इस क्रम को संसर्जन क्रम कहते हैं।
संसर्जन क्रम के बाद आती हैं।

४. अपुनर्भव चिकित्सा

अपुनर्भव मतलब व्याधी फिर से ना हो इसलिए की जाने वाली चिकित्सा ( Preventive treatment) इसमें प्रधान कर्म होने के बाद आगे १५ दिन औषधि और घी दिया जाता हैं जिससे प्रतिकार शक्ति बढ़ती है।

वमन विरेचन कर्म कब करने चाहिए?

निरोगी व्यक्ति ने वसंत ऋतु में यानी लगभग फरवरी-मार्च के दरमियान वमन कर्म और शरद ऋतु में याने लगभग सितंबर – अक्टूबर मे विरेचन कर्म करवाके लेने चाहिए।

बीमार व्यक्ति ने पंचकर्म कब करवाना चाहिए ?

बीमार व्यक्ति ने वैद्य की सलाह लेकर या बीमारीकी गंभीरता को ध्यान मे रखकर साल भर मे एकबार पंचकर्म करवाके लेना चाहिए।

वमन / विरेचन कर्म मे से कौनसा कर्म किसने करवाना चाहिए ?

उसके लिए भी वैद्य की सलाह आवश्यक है।

अनुमान ऐसा होता है कि जिनकी प्रकृति कफ की है और जिनको कफ की बीमारियां है जैसे बार बार सर्दी होना, खासी, अस्थमा, डायबिटीज, थाइरॉइड और अलग-अलग प्रकार के त्वचा रोग जैसे एग्जिमा, सोरियासिस हो उन लोगों को वमन कर्म करवाके लेना चाहिए और जिनकी पित्त की प्रकृति है और जिन्हे पित्त की बीमारीया है जैसे मासिक धर्म की समस्या, माइग्रेन, सिरदर्द, मलबद्धता, एसिडिटी हो उन्हे विरेचन कर्म करवाकर लेना चाहिए।

साल मे कितनी बार पंचकर्म करवा के लेना चाहिए?

जैसे हम साल मे एक बार घर की साफ सफाई करते है उसी प्रकार साल मे एक बार पंचकर्म करवाकर लेना चाहिए।

पंचकर्म के फायदे

१. शरीरशुद्धि होती है |

२. शरीर को ताकत मिलती है।

३. अपुनर्भव चिकित्सा – इस विधि से प्रतिकार शक्ति बढ़ती है।

इस ब्लॉग में हमने वमन और विरेचन के बारे मे जानकारी ली। अगर आपको कोई भी शंका हो तो हमारे

E-MAIL ID – aarogyam.ayurvedic.clinic@gmail.com पर आप हमे संपर्क कर सकते है ।

अगले ब्लॉग मे हम बस्ती कर्म के बारे मे जानेगे।

What is Panchakarma? Blog – 56

Hello welcome to Treasures of Ayurveda.

Panchakarma, Panchakarma, Panchakarma….. we had a lot about panchakarma now adays. Someone says panchakarma is massage, someone says panchakarma is vomitting , loose motion, procedure.

Not many know what is actual panchakarma?

So let’s understand in todys blog

What is PANCHAKARMA?

PANCH means = FIVE and

KARMA means = PROCEDURES

Panchakarma means “Five procedure which Purification your body and Strengthening your body.

Five procedure of Purification of the body are

  • Vaman
  • Virechan
  • Basti
  • Nasya
  • Raktmokshan

And five procedure for Strengthening body are

  • Snehan
  • Swedan
  • Shirodhara
  • Nasya
  • Basti

Nasya and basti are included in both the Karmas. why ?

Because according to the oil, ghee or kadha use in nasya and basti, these procedures give either the benefit of purification or strengthening of body.

So let us first understand about Body Purification Panchakarma.

In today’s blog we are discuss about VAMAN and VIRECHAN.

VAMAN and VIRECHAN

1. DURATION: 15 DAYS

Vaman and Virechan Panchkarma are of 15 days duration. The science behind vaman and virechan is that here your digestive system is use for purification. So during the procedure your digested system should be given a rest from everyday digestion procedure. Hence the mantra for these procedures is-

Mantra – Eating only that much food which is needed for survival.

This mantra you have to follow for 15 days. Let understand this concept with an example.Suppose if a machine is put on purification mode, then it’s main function should be stopped till the time it is getting cleaned up.

Same ways,when we want our body machine to be purified , then it’s main function of digestion should be given a break so that our body uses its digesting system for it’s own purification.

2. PROCEDURE(VIDHI) :

Procedure means Vidhi.

Vaman and Virechan Procedure is divided into 4 part.

  • Snehapan
  • Pradhan Karma
  • Sansarjan Kram
  • Apunarbhav Chikitsa

1. Snehapan :

Snehapan means to consume Medicated Ghee.

This Karma last for roughly 6 to 7 days.

In this Karma ,in the morning on empty stomach patient is given MEDICATED GHEE to consume in increasing order of quantity. i.e on first day you have to consume 4 teaspoon ghee , 2nd day 8 teaspoon, then 10, 12, 16 and so on.

When you consume Medicated Ghee and you don’t get burp of odour of the ghee that means ghee is digested. Then rest of the day you are advised to consume Moong dal Khichadi. i.e Rice and Moong Dal preparation whenever you feel hungry and whenever you feel thirsty you have to drink only Warm Water.

By consumeing ghee in large quantities the toxins of the body get’s Liquified.

Then after Snehapaan Snehan i.e.Massage and Swedan i.e. Steambath is done. Here the role of Snehan and Swedan can be explained with an example – When your are cleaning your house ,the dirt falls on the floor then you have to collect the dirt at one place first before you throw it out. In the same way when we are purifying the body, with snehapaan the toxins of the body are liquefied then first we have to bring it to one place and then throw them out through nearest way. This bringing of toxins from the extremities into the center of body before throwing them out is done by Snehan and Sweden. This is the role of massage and steam in this panchakarma procedure.

2. Pradhan Karma :

After snehapan , snehan and swedan procedures, the toxins come to the center of body, from there we have to throw them out through the nearest opening of the body.

If these toxins try to come out by vomitting , then kadhas are given to drink and vomiting is induced. This procedure of throwing out toxins from body by induced Vomitting is called as VAMAN

And if these toxins try to come out by loose motions , then tablets are given to induce loose motions . This procedure of throwing out toxins from body by induced Purgation is called VIRECHANA.

3. Sansarjan Kram :

This kram starts from 10th day of therapy and ends on 15th day. Sansarjan Kram means the order in which we have to start eating food after therapy. We slowly start from liquid diet then semi solid and finally solid normal diet. Vaman and Virechan Karma are as good as upvas i.e dieting as we eat very little food only khichadi during the therapy.So after finishing the therapy following the diet routine is very important.So this order beginning with light to digest food and then heavy to digest food is called Sansarjan Kram.

4. Apunarbhav chikitsa :

Apunarbhav chikitsa is a very unique form of chikitsa told by Ayurveda. Apunarbhav means Preventive medicine. This is advised so that the disease doesn’t recur. After Pradhan Karma (vaman and virechan) starts Apunarbhav chikitsa. In this therapy, such medicines and medicated ghee are given for next 15 days to one month which increases immunity.

What time of year should we do Vaman and Virechan?

In healthy people in Vasant hritu that is ruffly in March/ April one should get Vaman Karma done and in Sharad hritu that is ruffly in September/ October one should get Virechan Karma done. And does our disease they should consult Vaidya first and then according to the simiralities our disease they should get Vaman and aur Virechan Karma done.

So how will we know that we have to get Vaman Karma done and Virechan Karma Done. For that to you need to consult Vaidya properly.

The person who has cough prakruti and who are suffering from cough diseases, like cough, cold, Joint pain, Asthma, Diabetes, Thyroid, Skin diseases like Eczema, Soriasis they should good go for Vaman Panchakarma.

The people who are Pittah Prakruti and who are suffering from Pittah diseases, like recurrent Headache, Migraine, Acidity, Gases, Constipation, Infertility, Various Period problem such people should go for Virechan Panchakarma.

What are the benefits of vaman and Virechan?

1. The most important is Body purification.

2. Body strengthening.

3. Apunarbhav chikitsa that is your immunity increases.

So how many times in a year should we do Vaman and Virechan?

As we cleaner on once a year same bases you can get your body clean buy Vaman and Virechan after consulting a vaidya.

In this blog we discuss in detail about Vaman and Virechan. In next blog we will be discussing about basti Karma. Panchakarma series continuous wear we will be discussing about body purification as well as body strengthening panchakarmas.

So to get detail about all panchakarmas do follows our treasures of ayurveda blog. If you any doubt about this blog do contactors on our gmail address aarogyam.ayurvedic.clinic@gmail.com and a like our blog as much as possible so that panchakarma information goes to many people.

Stay Healthy Stay Blessed.

Thank you.

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पंचकर्म म्हणजे काय? (Marathi Blog No – 03) Blog – 54

पंचकर्म, पंचकर्म, पंचकर्म….आज काल आपण सगळीकडे ऐकतो कि पंचकर्म म्हणजे तेलाने मसाज, पंचकर्म म्हणजे जुलाब, उलट्या वगैरे.

पण पंचकर्म म्हणजे नेमके काय ?

चला मग जाणून घेऊन आपल्या आजच्या ब्लॉग मध्ये ‘पंचकर्म म्हणजे काय ?

पंचकर्म –

पंच म्हणजे ५ आणि कर्म म्हणजे क्रिया.

पंचकर्म म्हणजे अश्या ५ क्रिया ज्याने शरीराची शुद्धी होते किंवा शरीराला ताकत मिळते.

  • शरीरशुद्धी पंचकर्ममध्ये खालील गोष्टींचा समावेश होतो

      1. वमन

2. विरेचन

3. बस्ती

4. नस्य

5. रक्तमोक्षण

  • शरीराला ताकत देण्याऱ्या पंचकर्ममध्ये खालील गोष्टींचा समावेश होतो –    

1. स्नेहन

2. स्वेदन

3. नस्य

4. शिरोधारा

5. बस्ती

नस्य आणि बस्ती यांचा दोन्ही पंचकर्ममध्ये समावेश होतो कारण नस्य आणि बस्ती ह्या कर्मासाठी ज्या प्रकारचे तेल, तूप, काढे वापरले जातात त्यानुसार त्यांनी शरीरशुद्धी होते किंवा शरीराला ताकत मिळते हे ठरते . त्यामुळे त्यांचा दोन्ही पंचकर्मात समावेश होतो.

पहिले जाणून घेऊया शरीरशुद्धी पंचकर्माबद्दल

वमन व विरेचन

कालावधी – वमन व विरेचन या शरीरशुद्धी क्रियेसाठी १५ दिवसांचा कालावधी लागतो.

शास्त्र – या क्रियेमध्ये तुमची पचन शक्ति ही शरीरशुद्धीसाठी वापरली जाते. त्यामुळे ‘जगण्यापूरते खाणे’ हा मंत्र १५ दिवस पाळवा लागतो . म्हणजे या शरीरशुद्धी क्रियेमध्ये पचनशक्तिला त्याच्या नेहमीच्या पचनक्रियेपासून विश्रांती द्यावी लागते आणि त्या पचनशक्तिचा शरीरशुद्धीसाठी वापर करायचा असतो हा येथे हेतू असतो .

विधी –  वमन/विरेचन विधी हा चार विभागात विभागला जातो.

  1. स्नेहपान
  2. प्रधान कर्म
  3. संसर्जन क्रम
  4. अपुनर्भव चिकित्सा

1. स्नेहपान – वाढत्या प्रमाणात औषधी तूप सेवन करणे.

हा विधी साधारण ५ ते ६ दिवस चालतो. ह्या क्रियेमध्ये वाढत्या प्रमाणात औंषधी तूप पिण्यास देतात . वाढत्या प्रमाणात म्हणजे पहिल्या दिवशी  ४ चमचे, दुसऱ्या दिवशी ८ चमचे मग १२, १६ असे. तूप पिल्यावर गरम पाणी पित राहणे आणि जेव्हा तूपाचे ढेकर यायचे बंद होतील, म्हणजे तूप पचले आहे. त्यानंतर तहाण लागेल तेव्हा गरम पाणी पिणे आणि भूक लागेल तेव्हा मूग आणि भाताची खिचडी खाणे हा सर्वसामान्य विधी असतो.

या औषधी तूपामुळे आपल्या शरीरातील आम (टॉक्सिन्स) पातळ होतो.

त्यानंतर स्नेहन म्हणजे मसाज आणि स्वेदन म्हणजे स्टीमबाथ दिली जाते .

स्नेहन व स्वेदन-इथे स्नेहन व स्वेदनामुळे शरीरातील पातळ झालेला आम (टॉक्सिन्स) शरीराच्या मध्य भागी आणणे हा उदेशअसतो. ज्याप्रमाणे आपण घराची साफ सफाई केल्यावर कचरा खाली पडतो मग आपण तो कचरा गोळा करतो आणि नंतर बाहेर फेकतो. त्याप्रमाणे स्नेहपान क्रियेमुळे शरीरातले आम (टॉक्सिन्स) पातळ झाल्यावर स्नेहन स्वेदन कर्मामुळे सर्व आम (टॉक्सिन्स) शरीरातील मध्यभागी आणला जातो .

2. प्रधान कर्म –

स्नेहन आणि स्वेदनकर्म झाल्यानंतर जेव्हा हा आम (टॉक्सिन्स) उलटी द्वारे बाहेर काढला जातो तेव्हा त्या कर्मास वमन कर्म असे म्हणतात आणि जर हा आम (टॉक्सिन्स) जुलाबांद्वारे बाहेर काढला जातो तेव्हा त्या कर्मास विरेचन असे म्हणतात.

3. संसर्जन कर्म –

हा विधी १० व्या दिवसापासून १५ व्या दिवसापर्यंत असतो. उपवास सोडताना जसे आपण पहिले हलके अन्न खातो व नंतर हळूहळू जड अन्न खाण्यास सुरुवात करतो त्याप्रमाणे वमन आणि विरेचन या विधीत आपला एकप्रकारे उपवासच होतो. त्यामुळे प्रधान कर्मानंतर आपण हळुहळु हलके अन्न खाण्यास सुरुवात करतो जसे पहिल्या दिवशी भाताची पेज, नंतर मऊ भात, मग खिचडी, भाकरी. असे हळु हळु पचनास जड पदार्थ क्रमाने खाण्यास सुरुवात करतात म्हणून या विधीस संसर्जन क्रम असे म्हणतात .

अपुनर्भव चिकित्सा –

अपुनर्भव म्हणजे ‘आजार परत होऊ नये म्हणून करावयाची चिकित्सा’ म्हणजे Preventive treatment. या विधीमध्ये पंचकर्म शरीरशुद्धी झाल्यावर शरीराला ताकत देण्यासाठी व परत आजार होऊ नये म्हणून पुढे १५ दिवस औषधे ,औषधी तूप , रसायन कल्प दिले जातात , ज्यांचा सेवनाने आपली प्रतिकार शक्ती वाढते आणि आपल्याला आजार होत नाही.

वमन आणि विरेचन कधी करावे ?

निरोगी व्यक्तीनी वसंत ऋतु मध्ये म्हणजे फेब्रुवारी/मार्च मध्ये वमन करून घ्यावे आणि शरद ऋतुमध्ये म्हणजे सप्टेंबर /ऑक्टोबर मध्ये विरेचन कर्म करून घ्यावे.

आजारी व्यक्तीनी पंचकर्म कधी करावे?

ज्यांना आजार असेल त्यांनी वैद्याच्या सल्यानुसार आणि आजाराच्या गांभीर्यानुसार वर्षभरात कधीही वमन किंवा विरेचन हे कर्म करून घ्यावे.

वमन/विरेचन कर्मापैकी कोणते कर्म कोणी करावे?

त्यासाठी सुद्धा वैद्याचा सल्ला घेणे आवश्यक आहे.

तरी ढोबळ मानाने कफ प्रकृतीच्या लोकांनी आणि ज्यांना कफाचे आजार आहेत जसे जुनाट सर्दी, खोकला, दमा, स्रावी त्वचारोग, स्थौल्य, थाईरॉईड, मधुमेह आदि त्यांनी वमन कर्म करून घ्यावे आणि ज्या लोकांची प्रकृती पित्ताची आहे आणि ज्यांना पित्ताचे आजार आहेत जसे डोकेदुखी, एसिडिटी, गॅसेस,पचनाचे विकार, पाळीच्या तक्रारी, त्वचारोग आदि अशा लोकांनी विरेचन कर्म करून घ्यावे .

वर्षातून किती वेळा पंचकर्म करावे?

घराची साफसफाई जशी आपण वर्षातून एकदा करतो त्याप्रमाणे वर्षातून एकदा वमन किंवा विरेचन कर्म आपल्या प्रकृती व आजारानुसार करवून घ्यावे .

फायदे –

१. शरीरशुद्धी होते.

२. शरीराला ताकत मिळते.

३.अपुनर्भव चिकित्सा – या विधीमुळे आपली प्रतिकार शक्ती वाढते.

ही वमन व विरेचनबद्दल थोडक्यात माहिती होती.तुमच्या काही शंका असतील तर तुम्ही aarogyam.ayurvedic.clinic@gmail.com वर आमच्याशी संपर्क साधू शकतात.

पुढील ब्लॉग मध्ये आपण बस्ती कर्माबद्दल माहिती करून घेऊया .

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मूळव्याधीवर घरगुती उपाय (Marathi Blog No – 02) – Blog – 53

मागच्या ब्लॉग मध्ये आपण ‘ऑक्टोबरचा आरोग्य मंत्र’ हा विषय जाणून घेतला.ऑक्टोबरच्या उन्हाळ्यात विविध प्रकारचे आजार होतात. त्यापैकी मूळव्याध हा अत्यंत त्रासदायक आणि खूप वेदनायुक्त आजार आहे.

आजचा आपला विषय आहे  – मूळव्याध

पहिले जाणून घेऊया मूळव्याध हा आजार कोणाला जास्त संभवतो?

जे लोक अधिक प्रमाणात मांसाहार, तिखट पदार्थ, मसाल्याचे पदार्थ यांचे सेवन करतात आणि ज्यांना मलबद्धतेचा त्रास असतो त्या लोकांना हा आजार जास्त संभवतो.

मूळव्याध होऊ नये म्हणून काय काळजी घ्यावी?

१. मलबद्धता होऊ न देणे.
२. उन्हाळ्यात निरोगी राहण्यासाठी आरोग्य मंत्राचे पालन करावे.

‘ऑक्टोबरचा आरोग्य मंत्र’ आहे

पांढरे, गोड, पानीयुक्त, नारळयुक्त आणि उकडलेल्या पदार्थाचे उन्हाळ्यात अधिक सेवन करावे.

१. पांढरा रंग हा पित्तशामक आहे. तो शीतता प्रदान करतो. त्यामुळे पांढऱ्या रंगाचे पदार्थ हे शरीरातले पित्त संतुलित ठेवतात म्हणून पांढऱ्या रंगाचे पदार्थ अधिक खावेत जसे दूध, दूधाचे पदार्थ, तूप, लोणी, ताक. उन्हाळ्यात जेवणामधे ताकाचे खूप जास्त प्रमाणात सेवन करावे कारण ताक मूळव्याधीवर खूप गुणकारी आहे.

२.पांढऱ्या रंगाची फळे ही पित्त शमन करतात आणि पोट सुध्दा साफ ठेवतात. त्यामुळे उन्हाळ्यात पांढऱ्या रंगाच्या फळांचे अधिक सेवन करावे जसे पेरू, सफरचंद, केळी, पिअर आदि

३) हिरवी मिरची, आले, लसूण आणि मिरे हे जेवणात टाळावे. उन्हाळ्यात हिरवी मिरची कच्च्या स्वरूपात अधिक प्रमाणात खाण्यात आली जसे चटणी, पाणीपुरी मधे तर मूळव्याधीतून रक्‍त पडायला सुरुवात होते.

मूळव्याधीतून पडणारे रक्त कसे थांबवावे?

मूळव्याधीतून पडणारे रक्त थांबवण्यासाठी कांदा सालीसोबत गॅस वर भाजावा नंतर साल काढून नुस्ता कांद्याचे सेवन करावे किंवा कांद्याचे दहीसोबत सेवन करावे. या उपायाने मूळव्याधीतून पडणारे रक्त लगेचच थांबते.

मूळव्याध झाल्यावर काय पथ्य करावे?

१) हिरवी मिरची, आले, लसूण, मिरे यांचे सेवन पूर्णतः बंद करावे.
२) जेवणामध्ये ताकाचे प्रमाण अधिक वाढावावे.
३) आठवड्यातून २-३ वेळा सुरणाच्या भाजीचे सेवन करावे.

सुरणाची भाजी बनवण्याच्या आधी सुरण कापून ते ताकामध्ये भिजत टाकावे त्यामुळे सुरणातले क्षार ताकामध्ये विरघळतात. क्षारासोबत सुरणाच्या भाजीचे सेवन केले तर जीभ , घशाला खाज सुटणे,मुतखडा, संधिवात यासारखे आजार होण्याची संभावना असते.

जर मूळव्याधी बरोबर आपल्याला मलबद्धता असेल तर जेवणाआधी गरम पाणी किंवा गरम दुधात एक चमचा तूप किंवा एक चमचा बदाम तेल मिसळून त्याचे सेवन करावे. याने मलबद्धता जाते, गॅसेस कमी होतात आणि मूळव्याधीच्या ठिकाणी असलेली रुक्षता व आग कमी होते.

तसेच रोज सकाळ-संध्याकाळ एक चमचा त्रिफळा चूर्ण किंवा एक त्रिफळा गोळीचे उपाशीपोटी गरम पाण्यासोबत सेवन करावे.

या सर्व उपायांनी मूळव्याधीच्या त्रासापासून तुम्हाला उपशय जरूर मिळेल.

तरीही एकदा वैद्य किंवा डॉक्टरांचा सल्ला जरूर घ्या आणि आयुर्वेदाच्या पंचकर्मामधील ‘क्षारसूत्र’ या विधीमुळे मूळव्याध हा मुळातून काढता येतो त्याचा उपयोग जरूर करून घ्या.

उन्हाळ्यातील विविध आजारांपासून वाचण्यासाठी ‘ऑक्टोबरचा आरोग्य मंत्र’ याचे पालन करा .

Stay Healthy Stay Blessed

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ऑक्टोबरचा आरोग्य मंत्र (Marathi Blog No – 01) Blog – 52

ऑक्टोबर सुरू झाला………. गरमी सुरू झाली आणि त्यासोबत सुरू झाले गरमीचे सर्व आजार जसे घामोळ्या, नाकातून रक्त येणे, पोटदुखी, डोकेदुखी, माइग्रेन , मूलव्याधि आदि

या आजारांपासून आपण कसे वाचू शकतो?

सणांच्या मदतीने.

ते कसे? चला जाणून घेऊया.

प्रत्येक सण, परंपरा या धार्मिक गोष्टिंच्या मागे शास्त्र असते. लोकांचे आरोग्य चांगले रहावे म्हणून आपल्या ऋषिंनी शास्त्र आणि धर्माची सांगड घातली आणि शास्रांचे सिद्धान्त धर्माबरोबर बसवले जेणेकरून सर्व जणांनी धर्माचे पालन केले तर शास्त्राचे पालन होईल आणि समाजातील सर्व लोक निरोगी राहतील .

सण सुद्धा कधीही येत नाहीत. सण शास्त्रीय दृष्टीने बसवलेले असतात.

सण ऋतुंच्या संधीला येतात. जसे उन्हाळ्याच्या आधी गणपती, हिवाळ्याच्या आधी दिवाळी. सण आपल्याला शिकवतात की पुढे येणाऱ्या ऋतुमध्ये आहार-विहार मध्ये काय बदल केल्याने आपण निरोगी राहू शकतो.

ते कसे ते जाणन्यासाठी सणांच्या मागील शास्त्र समजून घेऊया .

ऑक्टोबरच्या आधी गणपती सण येतो. आपल्या सगळ्यांचे आवडते गणपती बाप्पा.

आपण कधी विचार केला आहे का कि गणपती चकली, चिवडा का नाही खात?

कारण गणपती नंतर ऑक्टोबर ची गरमी येणार असते. ऑक्टोबर ऋतूमध्ये निरोगी राहाण्यासाठी जे योग्य आहार ते आपण गणपतीला प्रसाद म्हणून चढवतो. म्हणजे प्रत्येक सणाला सांगितलेला आहार विहार हा आपल्याला प्रतिकात्मक सांगतो की येणाऱ्या ऋतुमधे आहार विहारामधे काय बदल केल्याने आपण निरोगी राहू शकतो.ऑक्टोबरमध्ये खुप गरमी असते त्यामुळे गणपतीला प्रसाद म्हणून असे पदार्थ चढवतात जे उन्हाळ्यात आपल्याला निरोगी ठेवतील. मोदक प्रतीकात्मक सांगतो की उकडलेले पदार्थ खा म्हणजे उन्हाळ्यात तहान तहान होणार नाही , पित्त संतुलित राहिल , गरमीचे आजार होणार नाहीत. म्हणून गणपति चकली , चिवड़ा नाही खात.

ऑक्टोबरचा आरोग्य मंत्र आहे.

पांढरे, गोड, उकडलेले, नारळयुक्त आणि पाणीदार पदार्थांचे सेवन करावे.

१) ऑक्टोबर मध्ये पित्त खूप भडकते आणि पांढऱ्या रंगांचे पदार्थ पित्त कमी करतात. त्यामुळे त्यांचे अधिक सेवन करावे.

  • पांढऱ्या रंगाचे पदार्थ जसे ताक, दूध, दुधाचे पदार्थ, दही, कढी, तांदूळ, नारळ
  • पांढऱ्या रंगांची फळे जसे सीताफळ, पेरू, केळी, पेअर, सफरचंद आदि

२) मधुर रस पित्त शामक असतो म्हणजे पित्त कमी करतो म्हणून ह्या ऋतुमधे गोड़ पदार्थ खावेत.

३) ऑक्टोबर मध्ये गर्मी खूप असते. ह्या गरमीमध्ये जर आपण तळलेले पदार्थ खाल्ले तर पित्त वाढते आणि तहान लागते. त्यामुळे ऑक्टोबर मध्ये उकडलेल्या पदार्थांचे सेवन जास्त करावे.

४) जेवणामध्ये नारळाचा उपयोग जास्त करावा. नारळ पांढरा रंगाचा, गोड आणि पाणीयुक्त आहे. त्यामुळे उन्हाळ्यात याचा जेवणात अधिक प्रमाणात उपयोग केला तर पित्त संतुलित रहाते आणि शरीर निरोगी राहते. जसे नारळाचे वाटप, नारळाचे दूध, नारळाचे पाणी,नारळाचा खीस आदि

५) या ऋतूत गुणाने थंड असलेले पेय यांचे अधिक सेवन करावेत. कारण ऑक्टोबरच्या गरमी मुळे शरीरातून घामाद्वारे पाणी आणि क्षार अधिक प्रमाणात बाहेर निघुन जातात त्यामुळे शरीरातील पानी आणि इलेक्ट्रोलाइट चे संतुलन ठेवण्यासाठी विविध प्रकारचे सरबत थोडे मीठ घालून सेवन करावेत जसे खसबसरबत, सोलकढी , लिम्बु सरबत , उसाचा रस यांचे अधिक प्रमाणात सेवन करावे.

अशा रीतीने शास्त्रीयदृष्ट्या आपण सणांचे पालन केले तर प्रत्येक ऋतूत आपण निरोगी राहू.

आश्चर्यचकित झालात ना ऐकून की सणाच्यामागे सुद्धा एवढा शास्त्रीय विचार आहे. तर चला मग प्रत्येक सणाकडे आज पासून डोळसपणे बघूया.

प्रत्येक ऋतुच्या आरोग्य मंत्राचे पालन करूया. त्याची सुरुवात ह्या ऑक्टोबर पासून ऑक्टोबरचा आरोग्य मंत्र पालुन करूया.

Stay Healthy Stay Blessed.

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Home Remedy For Bleeding Fissure And Piles – ONION (Home Remedy – 07) Blog – 51

Our today’s topic is – Fissure and Piles

Fissure and Piles are very troublesome and painful diseases as they hamper our daily activities. And if bleeding starts from fissure and piles then the trouble doubles and leads to lot of weakness too.

So let us understand

Who are more prone to having fissure and piles?

People who consume spicy food, non veg and those who are constipated ,they suffer more from this disease.

How to prevent these diseases?

1) Avoid getting constipated.

2) Follow “HEALTH MANTRA”of summer season.

The link of HEALTH MANTRA video named Immunity booster for october- Coconut is shared  below ,do watch the video

So ‘HEALTH MANTRA’ for summer is –

“Eat Sweet, White, Watery, Coconut and Boiled food to avoid diseases of summer season.

So what to eat?

  • Eat food which is white in colour like rice, coconut etc.
  • Eat white fruits like apple, guava, banana, custard apple etc as white things are coolant.
  • In diet have more of milk and milk products likes ghee, buttermilk, makkhan i.e butter.
  • Avoid oily and spicy food esp green chilli, pepper, ginger, garlic.

In summer season if you don’t follow HEALTH MANTRA and eat lot of spicy food likes raw green chillies in form of chutney, sandwich, pani puri then bleeding starts from fissure and piles.

How to stop this bleeding?

Simple home remedy is –

ONION – Roast onion on the stove with the peels then take out the peels and consume it or have onion with curd. This remedy immediately stops bleeding from fissure and piles.

What diet changes to do if you get fissure and/or piles ?

1) Completely stop green chillies, pepper, ginger, garlic.

2) Consume a lot of buttermilk in both meals.

3) Eat SURAN vegetable. i.e. Elephant yam atleast 2-3 times in a week.

Before making SURAN vegetable, soak suran in buttermilk for an hour then wash it with warm water. As suran contains alot of calcium oxalates it should be soaked in buttermilk to remove oxalates. Eating suraj in raw form causes throat, tongue irritation and increases chances of joint pain as well as kidney stone.

4. Avoid eating green leafy vegetables and salads as fibres in them rub against pile mass and fissure and thus aggregates pain.

If you are constipated – to relief constipation consume 1 cup milk or 1 cup warm water added with 1 teaspoon of ghee or one teaspoon of almond oil before meals. This relieves constipation and flatus, as well as soothens anal skin and thus eases irritation and burning in anal area.

5. Every day in the morning and at night consume 1 teaspoon of Triphala powder or 2 tablets of Triphala on empty stomach with warm water.

All these home remedies will act as preventive measures against fissure and piles or will relieve your symptoms of fissure and piles.
But still you need to consult a doctor to treat the root cause.

In panchakarma,a therapy called KSHARSUTRA cuts the pile mass from the base and thus removes it completely.

So do take advantage of Ayurveda to stay completely away from fissure and piles.

And follow health mantra and home remedies to prevent as well as cure fissure and piles. Hope you benefit from our home remedies.

Stay connected with us for more home remedies.

Till then Stay Healthy Stay Blessed.

बवासीर का खून तुरंत रुकाए – प्याज (घरेलू नुस्का – 07) Blog – 50

आज का हमारा विषय है – बवासीर

बवासीर यह बहुत ही वेदनायुक्त और तकलीफ देने वाली बीमारी है| क्योंकि हर वक्त उठते बैठते यह बीमारी बहुत परेशानी देती है और अगर बवासीर से खून गिरने लगे तो दर्द और परेशानी के साथ कमजोरी और टेंशन भी बढ़ने लगता है|

बवासीर किन लोगों में ज्यादा होता है?

जो लोग ज्यादा तीखा , ज्यादा मांसाहार खाते है और जिनको मलबद्धता की तकलीफ होती हैं उनमे बवासीर ज्यादा पाया जाता है|

इस बवासीर की बीमारी से कैसे बचे?

१)मलबद्धता मत होने दिजिए।
२) गर्मी के लिए बताए गए आरोग्य मंत्र का पालन करें|

आरोग्य मंत्र की वीडियो लिंक हमने नीचे डिस्क्रिप्शन में बताई है वह जरूर देखें|

गर्मी का आरोग्यमंत्र है

सफेद, मीठे, पानीयुक्त, नारियल युक्त और उबाले हुए पदार्थ खाए।

  • सफेद पदार्थो का सेवन ज्यादा करें जैसे दूध और दूध के पदार्थ विशेष रूप से घी और मक्खन , चावल, नारियल|
  • सफेद फल जैसे अमरूद, सेब, केला, सीताफल रोज खाइए|
  • और तीखे और तले हुए पदार्थ बहुत कम मात्रा में खाइए|

अगर बवासीर से खून गिरने लगे तो क्या करें?

गर्मी में अगर हम कच्ची हरी मिर्च का सेवन करेंगे जैसे चटनी, पाणी पूरी आदि में तो बवासीर से खून गिरने लगता है |

  • इस खून को तुरंत रुकाने के लिए प्याज छिलके के साथ गैस पर सेके और छिलका निकाल कर उसका सेवन करें|
  • या प्याज को दही के साथ मिलाकर उसका सेवन करें।
  • और हरी मिर्च, अदरक, लहसुन , काली मिरी बिल्कुल मत खाए।

बवासीर होने पर हमे क्या परहेज करने चाहिए ?

  • हरी मिर्च और तीखे पदार्थ,अदरक, लहसुन , काली मिरी मत खाए ।
  • हर रोज खाने में ज्यादा मात्रा में छाछ का सेवन करें।
  • सुबह और शाम त्रिफला का चूर्ण या त्रिफला की गोली का सेवन करे।
  • हफ्ते में २-३ बार जिमीकंद (सूरन) की सब्जी बना कर खाएं। सूरन बावासीर हटाने में बहुत अच्छा काम करता है|

सूरन की सब्जी बनाते वक्त पहले सूरन को एक घंटा छाछ में भिगोकर फिर गरम पानी सेअच्छे से धो दें। इससे सूरन में जो क्षार होते है वह निकल जाते है| सूरन को ऐसे नहीं पकाया तो उससे गले में खराश, पथरी ,संधिवात जैसी बीमारिया होने की संभावना बढ़ जाती है|

अगर आपको बवासीर के साथ मलबद्धता हो तो खाने से पहले गरम पानी या गरम दूध में एक चम्मच घी या बादाम का तेल मिलाकर उसका सेवन करें। इससे पेट अच्छे से साफ होता है, बवासीर की जगह की जलन कम होती है और उधर की त्वचा में आया हुआ रूखापन कम होता है|

इस तरह परहेज और घरेलू नुस्को से आपको बवासीर में काफी राहत मिल जाएगी। लेकिन बवासीर को जड़ से मिटाने के लिए आप वैद्य और डॉक्टर की सलाह जरूर लीजिये| पंचकर्म के क्षारसूत्र कर्म से बवासीर जड से निकलता है ।

यह घरेलू नुस्का आपको कैसा लगा जरूर बताइए और ऐसे घरेलू नुस्को के लिए हमारे साथ बने रहिए|
Stay healthy, Stay blessed ।

Eating Food While Watching T.V and Mobile is Increasing Proneness to Diseases. – Blog – 49

In Treasures of Ayurveda, We are going to give you a different perspective of looking at health which is going to keep you healthy.

So today’s topic is – “Respect food”.

Whole universe is made up of energy. Energy is transformed from one form into another along with information. If energy goes with wrong information then output is wrong. Same applies to food energy too.

We get energy from food we eat.

Food is full of energy and information. It is not a dead thing. The same food is making us everyday. The same food is making each cell of our body. It’s a big magic…. it’s a big transformation.

So Ayurveda calls it YAGYA…that’s a ritual. Because nothing in this whole universe can make you other than food.

No wealth, no material can make you. So we should look at food with a gratitude and respect.
Only making healthy food is not sufficient to remain healthy. But while making and eating food ,there should be correct information in the mind i.e. positive thoughts and vibes. Because those thoughts, vibes in the form of information are going to guide the food energy to get transformed into body cell. So if bad vibes go with food then ofcourse the end result will be bad ….


Nowadays we watch TV , play on mobile , listen to music while eating food…..so the result is n number of diseases are also increasing like diabetes, cancer and we don’t know the answer to these diseases.

Why this is happening ?
So ayurveda tells you a different perspective ……

That is this miraculous transformation of converting food to body cells should go with correct information.


So ayurveda has told few rules while eating and making food.

  • When we are eating and making food the environment should be calm, positive and pleasent.
  • The MIND should be healthy with good thoughts and positive vibes
  • You should sit down and eat… not standing… not walking.
  • While eating food TV, Mobiles, music… everything should be shut down.
  • PRAYER – You should pray before having food. With the prayer we are sending good , positive information with the food.

So the food with the correct information that”Please God…make me healthy with this food.” is going inside you and making you correctly….i.e. healthy.


If we are not paying attention to food while eating then we suffer different diseases like cancer….cancer cell gets wrong information and one cell gets divided into thousand cells …..so from where did this faulty information go to the cell? Ofcourse while making and eating food.


So we should not treat food as entertainment.

Food is God. We should respect FOOD.


You tell your food to make you healthy, you send in correct information and you become and remain healthy
So being healthy is in your hand.


Think healthy and be healthy and “Respect Your Food”

So include this perspective in your life and see miracles happening.
Stay tuned with us for more blogs.
Thank you

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खाना खाते वक्त टी.वी, मोबाइल देखने से बढ रही है बीमारियां। Blog – 48

ट्रेजर्स ऑफ आयुर्वेदा मे हम समय के साथ जो आरोग्य का सही अर्थ भूल चुके है उस पर थोड़ी रोशनी डालेंगे|

आज का हमारा विषय है – आहार 

आज हम आहार के प्रति नए दृष्टिकोण के बारे मे जानेंगे |

आहार से हमे ऊर्जा मिलती है|

हम जो अन्न खाते है उसीसे हमारे शरीर की हर एक पेशी बनती है।आहार को पुराने जमाने मे यज्ञ माना जाता था |

इसलिए हमे आहार के प्रति एक अलग दृष्टिकोन जानना बहुत जरूरी है|आहार सजीव है ,उसमे ऊर्जा है|आहार की यह ऊर्जा अगर सही जानकारी के साथ शरीर मे जाए तो हम निरोगी रहते है |

आयुर्वेद ने बताया है की खाना खाते वक्त कुछभी काम नही करना चाहिए |

  • खाना खाते वक्त हमारा मन शांत होना चाहिए |
  • खाना खाते समय टी.वी, मोबाइल बंद चाहिए |

1 . खाना खाते वक्त हमारा मन शांत होना चाहिए |  खाना खाते वक्त मन मे जो विचार होते है वही विचार हम अन्न के साथ शरीर मे लेते है और हम उसी तरह बनते है|

2 . खाना खाते समय टी.वी, मोबाइल बंद रखना चाहिए – खाना खाते समय टी.वी, मोबाइल, विडियो कुछ भी चालू नही रखना चाहिए| क्यूकी हमारा ध्यान उन चीज़ों में जाता है | इससे हम क्या खा रहे है हमे पता नही होता | टीवी, मोबाईल के विचार अन्न के साथ शरीर मे जाते है और इस गलत जानकारी के कारण हमारे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। हमे अलग अलग बीमारियाँ होने लगती है |

आहार यज्ञ है | आहार हमे हर रोज बना रहा है | उस आहार के साथ हम जो जानकारी शरीर के भीतर भेजते है हमारे शरीर की हर एक पेशी उस गुण की बनती है।

इसलिए सौ बीमारियो का एक इलाज है अन्न खाते वक्त हमारा पूरा ध्यान खाने पर होना चाहिए |

पहले हात जोड कर नमस्कार करना चाहिए | फिर एक पौजेटिव ऊर्जा खाने मे डाले । यह एक यज्ञ है | एक बहुत अद्भुत परिवर्तन है । रोटी ,सब्जी, दाल ,चावल से शरीर की हर एक पेशी बनाना आम बात नही है। अन्न की ऊर्जा का शरीर पेशी में परिवर्तन होते वक्त उसके साथ सही जानकारी information जानी चाहिए तब यह परिवर्तन सही होगा और निरोगी पेशीया बनेगी|जैसे कंप्यूटर मे हमने अगर गलत information जानकारी डाली तो हमे गलत result मिलेगा। पेशी निरोगी होगी तो वह अपना काम सही करेगी।और सब पेशियां अपना काम सही करने लगेगी तो हमे बीमारियां नही होगी।सिर्फ हेल्दी खाना पकाने से फायदा नही है | जब हम खाना खा रहे है उस समय जो वातावरण है वह भी सही चाहिए, अपना मन शांत होना चाहिए और उसके साथ हम जो जानकारी भेज रहे है वह भी सही होनी चाहिये |

यह दृष्टिकोण का हमारे खुद के लिए और विशेष करके छोटे बच्चो के लिए पालन करना बहुत जरूरी है, कि खाना खाते वक्त टी.वी, मोबाइल बंद होने चाहिये और खाते वक्त हमारा पूरा ध्यान खाने पर होना चाहिए |

इस तरह से हम अपने जीवनशैली की छोटी छोटी चीजों मे अगर बदलाव करे तो हम निरोगी रहते है। विशेष रूप से आहार में।

आप यह दृष्टिकोण अपने जीवन में जरूर अपनाए ।

Stay  Healthy Stay Blessed.

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Why Does Ganapatiji Eat Modak and Not Chakali, Chiwda ? (Health Mantra – 09) Blog -47

Have you ever wondered why Ganapatiji eat only modak and not chakali chiwda ?

The question is very interesting so is the answer.

Ganapati festival comes before October heat. And as we have learnt in last blog – The science behind festivals i.e. festivals advice us what changes to do in diet and routine according season change to remain healthy.

Ganapati festival marks the season change from rainy season to summer season. In summer season if we eat fried food like chakali, chiwda then it leads to increasing thurst as well as Pittah in the body.

According to ayurveda, october is Pittah Prakop Kaal i.e. it increases lot of Pittah in the body and leads to Pittah diseases like headache, migraine, fissure, piles, acidity etc.

Ganapati festival advices us what diet changes to do in October to remain healthy.

These are have food which have Pittah Shamak properties that is eat “White, Watery, Sweet, Coconut and boiled food. “

All these qualities are there in Modak. So we offer modak to Ganapatiji as Prasad. Thus Modak symbolically tell us what diet changes to be made in October to remain healthy.

  • White – White means to eat food which in white in colour like milk, milk product like butter milk, curd, paneer, cheese, butter, rice.
  • Watery means juices, sharbats.
  • Sweet means all kind of sweets.
  • Coconut means coconut milk, coconut water, grated coconut, coconut curry.
  • Boiled food.

All these food are Pittah Shamak i.e. they balance Pittah in body and thus keep us healthy in October.

So now you know why ganpatiji eats Modak.

So follow Health Mantra advised by Ganapatiji to remain healthy in October that is

Eat White, Watery, Sweet, Coconut & boiled food.

In our coming blog we will learn various home remedies for October diseases like fissure, piles etc.

So stay tune with us every Monday for new blog and follow the health mantra told by Ganapatiji in October. So till next Monday.

Stay Healthy, Stay Blessed.

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गणपतीजी मोदक ही क्यों खाते है ? चकली, चिवडा क्यों नही खाते ? (आरोग्य मंत्र – ०९) Blog – 46

आपने कभी सोचा गणपती जी मोदक ही क्यों खाते है ? चकली चिवडा क्यों नही खाते ?

सवाल जितना दिलजस्प है, जवाब भी उतना ही दिलजस्प है।

गणपती अक्टूबर की गर्मी के पहले आते है। और जैसे हमने पिछले ब्लॉग मे जाना ।

त्यौहार हमे ऋतु के नुसार आहार-विहार में क्या बदलाव करने चाहिए यह सिखाते है।

गणपती के बाद अक्टूबर की गर्मी आती है। गर्मी मे हम अगर बेसन की तली हुए चीजे जैसे चकली, चिवडा खाए तो प्यास और शरीर मे पित्त बढता है।

आयुर्वेद के नुसार अक्टूबर पित्त प्रकोप का काल है । इसलिए अक्टूबर मे पित्त बढाने वाली चीजे खाने से हमे सिरदर्द, पाइल्स, फिशर (बवासीर), पेट खराब होना, एसिडिटी ऐसी बिमारिया होती है। इसलिए अक्टूबर मे निरोगी रहने के लिए क्या खाना चाहिए यह बताने के लिए गणपती का त्यौहार आता है।

गर्मी मे पित्त कम करने वाली चिजे खानी चाहिए । जैसे सफेद, मीठे, पानीयुक्त, नारियल युक्त और उबाले हुए पदार्थ।

यह सब गुण तो मोदक मे है।

इसलिए गणपती को हम मोदक प्रसाद मे चढाते है। क्योंकि मोदक हमे प्रतिकात्मक समझाते है की अक्टूबर मे निरोगी रहने के लिए यह गुणवाले पदार्थ खाने चाहिए।

  • सफेद पदार्थ याने दूध, दही, छाछ, पनीर, चावल,
  • मीठे पदार्थ याने विविध पकवान्न,
  • पानीयुक्त याने अलग अलग तरह के शरबत, ज्यूस,
  • नारियल युक्त पदार्थ याने नारियल का दूध,नारियल का पानी, नारियल की करी और
  • उबाली हुई चीजों का हमे सेवन करना चाहिए।

आज आपने जाना की गणपती जी मोदक क्यों खाते है।

गणपती जी ने बताया हुआ आरोग्य मंत्र है।

अक्टूबर मे निरोगी रहने के लिए सफेद, मीठे, पानीयुक्त, नारियल युक्त और उबाले हुई पदार्थ खाने चाहिए।

कैसे लगा हमारा ब्लॉग कमेंट करके जरूर बताए।

अगले सोमवार नए ब्लॉग के साथ मिलते है। तब तक अक्टूबर का आरोग्य मंत्र जरूर अपनाए।

Stay Healthy Stay Blessed

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अक्टूबर का इम्युनिटी बूस्टर – नारियल एक सर्वगुण संपन्न फल – भाग २ (घरेलू नुस्का नं – 7) Blog- 45                                                                               

अक्टूबर का इम्युनिटी बूस्टर – नारियल भाग-१ इस ब्लॉग मे हमने जाना की नारियल आकाश मे उत्पन्न होता है| इसलिए उसमे आकाश तत्व की अधिकता होती है| और इसी कारन नारियल शरीर के आकाशतत्व वाले अवयव जैसे सिर, कान, पेट इनपर अच्छा काम करता है|

पिछले ब्लॉग मे हमने जाना की नारियल सिर और कान पर कैसे गुणकारी है और आज के ब्लॉग मे हम जानेंगे की नारियल ये पेट के लिए कैसे गुणकारी है|

नारियल सफ़ेद रंग का पानियुक्त और फाइबरयुक्त होता है| इसलिए वह शरीर मे पित्त और पानी के अंश को संतुलित रखता है |

इसलिए अक्तूबर मे नारियल का ३ तरह से सेवन करना चाहिए |

  • अख्खा नारियल
  • नारियल का पानी
  • नारियल का दूध

1. अख्खा नारियल –अक्खे नारियल को पीसकर हर रोज खाने मे इस्तमाल करना चाहिए| क्यूकी नारियल मे फाइबर का प्रमाण अच्छे अंश मे होता है|पिसा हुआ नारियल हम खाने मे इस्तमाल करेंगे तो हमारे शरीर मे कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड आदि (cholesterol, Triglyceride) नही बढेगे|

लेकिन नारियल का तेल निकाल कर उस तेल को हम आहार मे सेवन करेंगे तो वह शरीर में खून मे जमने लगेगा और फिर हमे कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड(Cholesterol, Triglyceride) ऐसी अलग अलग बीमारीयां होने लगती है|

इसलिए अक्तूबर के गर्मी मे हमे खाने मे रोज पिसे हुए नारियल का सेवन करना चाहिए| इससे पचन अच्छा रहता है ,पेट साफ रहता है और कोलेस्ट्रॉल भी नही बढता|

2 . नारियल का पानी – अक्तूबर मे गर्मी और पसीने की वजह से शरीर मे पानी का अंश कम / असंतुलित हो जाता है|इसलिए हमे सिरदर्द, जुलाब, पिशाब मे जलन ,माइग्रेन जैसी बीमारियां होने लगती है| यह बीमारियां न हो या फिर यह बीमारिया होने पर आयुर्वेद मे बताया है की पके हुए नारियल के पानी का सेवन करना चाहिए|

आयुर्वेद के अनुसार कौनसा भी कच्चा फल नही खाना चाहिए|

इसलिए कच्चा नारियल जिसको हम शहाळ बोलते है उसका पानी हजम करने के लिए बहुत भारी होता है|इसलिए आयुर्वेद के नुसार शहाळ याने कच्चे नारियल का पानी नही पीना चाहिए|

पके हुए नारियल मे इलेक्ट्रोलाइट बहुत अच्छी मात्रा मे होते है| इसलिए अगर हम पके हुए नारियल के पानी का सेवन करते है तो गर्मी मे शरीर का पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलित रहता है और हम बीमार नही पड़ते |

3. नारियल का दूध नारियल का दूध शीत और पित्तशामक होता है| इसलिए हर रोज के अलग अलग खाने के रेसेपी मे नारियल के दूध का करी, सोलकढी ऐसे विविध तरीके से इस्तमाल करना चाहिए |

इस तरह अक्तूबर की गर्मी से बचने के लिए नारियल का हमे विविध तरह से उपयोग करना चाहिए|

  • रोज सुबह खाली पेट नारियल, किशमिश और शक्कर खानी चाहिए|
  • नारियल का दूध नारियल का दूध और नारियल के पानी का सेवन करना चाहिए |और वैसे भी गणपती मे बताया ही है की मोदक खाओ क्यूंकि वह भी नारियल से बनते है

इस प्रकार से अक्टूबर का इम्युनिटी बूस्टर नारियल रोज खाओ और निरोगी रहो|

Stay Healthy Stay Blessed

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Immunity Booster For October – Coconut (Part – 2) (Home Remedy No – 07) Blog – 44

In our last blog October Immunity booster – COCONUT (part – 1) we learnt that Coconut grows in “Aakash Mahabhuts” i.e. space so it has more constituents of “Aakash Mahabhut” and so it works extremely good or works wonders on parts of the body which have dominance of “Aakaash mahabhut”. These are HEAD, EAR, INTESTINES and BLADDER.

In last blog we learnt about benefits of coconut for HEAD and EAR. In this blog we are learning how coconut is beneficial for INTESTINE and BLADDER? 

Coconut is white in colour and has good content of fiber and water. So it balances Pittah and water in body .

So in October heat we should eat coconut in 3 forms.

  • GRATED COCONUT
  • COCONUT WATER
  • COCONUT MILK

1. GRATED COCONUT – Start eating coconut in meals every day. Coconut has high fiber content so it doesn’t increase cholesterol and triglyceride if it is eaten along with fibers i.e. in raw form. But when we start extracting oil from it and use oil in cooking then it accumulates in the blood and so our cholesterol , trigylceides and other lipids start increasing.

So in October start eating raw form grated coconut in diet, as it’s high fiber content helps in digestion and keeps bowel movement good .

2. COCONUT WATER – In october ,due to heat and alot of sweating the water electrolyte balance in body gets disturbed and we fall sick with Loose Motion, Acidity, Urine Burning, Migraine, Headache and number of diseases. So to prevent diseases or to cure them ayurveda advices that we should drink coconut water of ripe coconut. 

Ayurveda says that no fruit should be eaten in raw form.

So Ayurveda doesn’t advise drinking coconut water of unripe coconut which we get on streets.

So in october we should consume coconut water of ripe coconut everyday. It has good balance of electrolytes in it so it maintains water and electrolyte equilibrium in our body and we remain Healthy.

3. COCONUT MILK – Coconut milk is coolant and balances Pittah in body. So we should be consumed Coconut milk in different recepies like Solkadhi, different curries etc.

So guys now you know that to combact october heat we shuold use Coconut in diet in varied forms.

  • In morning on empty stomach consume grated coconut with raisins and sugar.
  • rink coconut water and coconut milk of ripe coconut everyday.

That is why it is told in Ganpati to start eating Modak beacause it is also made up of Coconut.     

So start eating October immunity booster – coconut everyday remain healthy.

“अक्टूबर का इम्युनिटी बूस्टर – नारियल| एक सर्वगुण संपन्न फल”- भाग -१ .(घरेलू नुस्का नंबर – ०६) BLOG – 43

पिछले आरोग्य मंत्र ब्लॉग – ०८ मे हमने जाना की “ऋतुचर्या याने ऋतु के नुसार आहार विहार मे बदलाव करने से हमारी प्रतिकार शक्ति अच्छी रहती है|

अभी अक्टूबर की गरमी आ रही है| आयुर्वेद मे इस ऋतु को शरद ऋतु कहते है| शरद ऋतु मे आहार विहार क्या बदलाव करे ये हमे नारली पौर्णिमा मे ही बताए है याने “नारियल खाओ और निरोगी रहो |”

आज का घरेलू नुस्का नंबर – ०६ है

“अक्टूबर का इम्युनिटी बूस्टर है – नारियल- एक सर्वगुण संपन्न फल|”

नारियल को हिंदू संस्कृति मे अनन्यसाधारण महत्व है| इसे श्रीफल कहते है| क्यूकी इसे भगवान को अर्पण करते है और हर एक शुभ कार्य की शुरुवात नारियल से की जाती है| नारियल का धार्मिक और आध्यत्मिक महत्व हम बाद मे जानेंगे|

लेकिन आज २ सितंबर को जागतिक नारियल दिन मनाया जाता है| इस अवसर पर हम नारियल का आरोग्य के दृष्टि से महत्व जरूर जानेंगे |

“निसर्ग पंचमहाभूतो से बना है – पृथ्वी, पानी, तेज, वायु, आकाश|” निसर्ग मे नारियल आकाश मे उत्पन्न होता है इसलिए नारियल का तेल आकाश के याने सफेद रंग का होता है| और जो तेलबीज जमीन मे आते है जैसे तील का तेल,सरसों का तेल वह भूमी के पीत रंग के होते है|

कितना सुन्दर है ना निसर्ग |

नारियल शीत और सफ़ेद रंग का होता है, इसलिए वह पित्त कम करता है| आयुर्वेद नुसार अक्टूबर मे निसर्ग मे गर्मी और शरीर मे पित्त बढ़ता है| इसलिए अक्टूबर का इम्युनिटी बूस्टर है नारियल| तो अब जानते है किस तरह से नारियल का सेवन करने से हम निरोगी रहेंगे|

हमने अभी जाना नारियल आकश मे उत्पन्न होता है| इसलिए इसमे आकाशतत्व की अधिकता होती है| इसलिए वह शरीर के आकाशतत्व वाले अवयवोपे अच्छा काम करता है | कौनसे है यह अवयव ? यह है – सिर, कान और पेट|

१ . सिर

आपने कभी देखा है नारियल और हमारे सिर मे काफी समानता है |

इसके बाल हमारे बाल, इसका कवच हमारा कवच याने Skull और इसके अंदर जो नारियल है वो हमारे मेंदू के समान है | इसके अंदर जो पानी होता है वो CSF याने सिर मे जो पानी होता है उसके समान होता है | इसलिए नारियल सिर के सब तरह के व्याधि मे बहुत अच्छा काम करता है और इन सब अवयव को पोषण देता है |

इसलिए अब गर्मी से रोज सुबह खाली पेट पका नारियल शक्कर के साथ खाना चाहिए| इससे पित्त संतुलित रहता है और बुद्धि, बाल और मेंदू को पोषण मिलता है| नारियल का तेल बालो के लिए अच्छा है | रोज रात सोते वक्त नारियल के तेल से तलवो को मालिश करनी चाहिए| इससे गर्मी मे होने वाली आखो की जलन कम होती है|

2 . कान

आयुर्वेद के नुसार कान ये आकाश तत्व का अवयव माना है| इसलिए आकाश के गुण शब्द हमे कान से सुनाई देते है| लेकिन ध्वनि प्रदूषण टी.वी, मोबाइल इनसे कानो मे वात बढता है, और हमे विविध कान की बीमारिया हो सकती है|

इसके लिए आयुर्वेद ने नारियल के तेल से “कर्णपूरन” करने को कहा है |

इससे कानो मे वात संतुलित रहता है और कानो का आरोग्य अच्छा रहता है|

कर्णपूरन याने हफ्ते मे एक दिन कानो मे नारियल के तेल के ४-४ बूंद डालकर १० मिनट लेट जाइए| और १० मिनट के बाद रुई से कानो को अच्छेसे साफ कीजिये| अगर कानो मे तेल रह गया तो फंगस हो सकता है|

आज हमने जाना की नारियल से सिर और कान को कैसे फायदा होता है| अगले ब्लॉग मे हम नारियल पेट के लिए कैसे गुणकारी रहेगा ये जानेंगे|

तब तक नारियल खाओ और निरोगी रहो |

Stay Healthy Stay Blessed.

            

Immunity booster for october – coconut , pART – 1.(home Remedy No – 06) blog – 42

In our last Health mantra blog – 08 we have learned that “Hritucharya i.e. changes in diet and routine according to season keeps us Healthy.”

Now October heat is coming. “In Ayurved this season is called SHARAD HRITU”.

So what changes to do in diet and routine in Sharad Hritu?…….. the changes are advised from Narali Pournima i.e. start eating coconut.

 So today’s Home Remedy No – 06 is

“Immunity Booster of October is – COCONUT.”

Coconut has an indispensible part in the Hindu religion and rituals. “It is referred to as shriphal” or divine fruit. Such is the importance given to Coconut. But about religious or philosophical significance of coconut we will study in our coming blogs.

Today on 2nd September on occasion of “WORLD COCONUT DAY.” We are going to study about the health benefits of coconut.

Universal is made up of 5 elements – Earth, Water, Fire, Space and Air.

Coconut grows in “Aakash mahabhut”. So coconut oil has the colour of Aakash i.e. white and others oil seeds like til, sesame they grow in “Pruthvi Mahabhut.” So they have the colour of Pruthvi i.e. Yellow.

Itsn’t nature fascinating. 

Coconut grows in Aakash Mahabhut. So it has more constituents of Aakash. So it works better on parts of body which have more constituents of Aakash.

According to Ayurveda these body part are – Head, Ear, Intestines and Bladder. So lets understands health benefits of coconut to each one of them

1 . HEAD –

Did you ever notice that there is a lot of Smilarity between a coconut and our Head? Coconut has hair, we have hair. It has hard shell, we have skull. The coconut from inside is similar to our brain and water similar to C.S.F. that is a fluid inside our head. That is why, coconut has alot of heath benefits for all the organs of our head.

So with start of October heat ……..

Start eating fresh ripe coconut with sugar in the morning on empty stomach.

So that it balances of Pittah in the body as well as it provides nourishment to Hair, Brain, Eyes and Ears. It is good for hair as well as eyes.

So at bed time we should apply coconut oil to feet and do massage so that our eyes remain cool and remain protected from october heat.

2. EAR –

According to Ayurveda EAR is an “Aakash” Mahabhut dominant organ. So becuase of noise pollution due to TV, mobile, vehicles etc. VAAT increases in Ear and so it leads to a lot of Ear problems like hearing impairement, tinnitus etc. According to Ayurveda, to balance Vaat in ear we should do “KARNA POORAN” with COCONUT OIL.

KARNA POORAN is instilling coconut oil in to Ear.

So once a week we should put 4/4 drops of coconut oil in each ear and lie down for 10 miutes. After 10 minutes when you get up clean your both ears with cotton properly, otherwise if oil remains in ear then it leads to fungal infection.

So in today’s blog we learnt health benefits of coconut for Head and Ear. In our next blog we will learn about its benefits for our Intestine and Bladder.

So till then start eating coconut and remain healthy.

Stay Healthy Stay Blessed.

WHAT IS IMMUNITY BOOSTER ? (HEALTH MANTRA – 08) BLOG – 41

Have you wondered. What is real IMMUNUTY ?

IMMUNITY is anything which prevent diseases. like exercise, healthy food, healthy routine.  

In Ayurveda all this is called Dincharya.

“Din means Day and charya means lifestyle. ie ideal lifestyle.”

But even after following ideal lifestyle we fall sick with change in season. Why?

Because we don’t change our routine and diet with change in season. In ayurveda changes in diet and routine are describe in detail under the heading “Hritucharya.”

“Hritu means Season and Charya means lifestyle.”

When is the cold outside we wear woolen clothes. But what about other diet and routine changes we don’t make changes in diet and routine according to season so fall sick.

So if by following Hritucharya we can prevent diseases. So is today’s terminology we can say Hritucharya is IMMUNITY BOOSTER.

So IMMUNITY BOOSTER is not a churn or powder or tablet. But IMMUNITY BOOSTER is complete change in diet and routine according to season. Isn’t it fascinating

So of course immunity booster would be different for each season.

In Ayurveda six Hrituchrya are describe to six seasons.

We will be disscussing it in a coming videos.

So today’s Health Mantra – 08

“Following Hritucharya is the real IMMUNITY BOOSTER”.

So in our next video will discuss about “Immunity booster for October Heat”

Stay healthy, Stay Blessed.

इम्युनिटी बूस्टर क्या है ? (आरोग्य मंत्र – ०८) BLOG – 40

इम्युनिटी बूस्टर…… इम्युनिटी बूस्टर….. है क्या ये चीज ?

इम्युनिटी मतलब प्रतिकार शक्ति |

मतलब हर चीज जो हमे निरोगी रखती है | जैसे कसरत, पौष्टिक अन्न,अच्छी दिनचर्या | लेकीन ऐसे आदर्श दिनचर्या का पालन करने पर भी ऋतु मे बदलाव होने पर हम बीमार पडते है | ऐसा क्यू ?

क्यू की ऋतु के बदलाव के नुसार हम अपने आहार और विहार मे बदल नहीं करते |

आयुर्वेद मे ऋतु के नुसार आहार और विहार बदल बताये गए है| उसको कहते है ऋतुचर्या |

हम ठंडी मे गरम कपडे पहेनते है | पर बाकी आहार विहार मे बदलाव नही करते इसलिए बीमार पडते है |

पर अगर हमने ऋतुचर्या का पालन किया तो हम निरोगी रहेंगे |

“ऋतुचर्या” को हम आज की भाषा मे इम्युनिटी बूस्टर कह सकते है |”

तो इम्युनिटी बूस्टर याने कोई चूर्ण या गोली नही |

इम्युनिटी बूस्टर याने ऋतुनुसार आहार विहार मे पूर्ण परिवर्तन करना |

इसलिए हर एक ऋतु के इम्युनिटी बूस्टर अलग रहेंगे | आयुर्वेद मे ०६ ऋतुओ की ०६ ऋतुचर्या बताई है |

इनके बारे मे हम आने वाले विडियो मे आपको जानकारी देंगे |

तो आज का हमारा आरोग्य मंत्र – ०८ है |

ऋतुचर्या ही इम्युनिटी बूस्टर याने प्रतिकार शक्ति बढाता है |

अगले विडियो मे हम जानते है की शरद ऋतु का आरोग्य मंत्र क्या है ?

तब तक के लिए Stay Healthy, Stay Blessed.

Thank you   

नारली पौर्णिमा से नारियल खाओ और निरोगी रहो|(आरोग्य मंत्र – 0६) Blog- 37

पिछले आरोग्य मंत्र वीडियोज मे हमने जाना कि निरोगी रहने के लिए हमारी प्रतिकार शक्ती अच्छी होनी चाहिए | और प्रतिकार शक्ती अच्छी रहने के लिए हमे ऋतु के नुसार हमारे आहार विहार मे बदलाव करने चाहिए |

आहार विहार मे क्या बदलाव करने चाहिए ये हमे त्यौहार सिखाते है |

कैसे ?

ये हमने आरोग्य मंत्र वीडियो नंबर – ०५ मे आपको बताया है |इस विडियो की लिंक ब्लॉग के नीचे दी है।

त्यौहार के नुसार आहार विहार मे बदलाव करने से हम निरोगी रहते है | लेकिन ये बदलाव सिर्फ उस त्यौहार के दिन अपनाने नही चाहिए, बल्कि उस त्यौहार से लेकर अगले त्यौहार तक ये  बदलाव हमे अपनाने चाहिए |

तो आज का हमारा विषय है |

नारली पौर्णिमा से नारियल खाओ और निरोगी रहो”.

कैसे ?

ये जानने के लिए हमे नारली पौर्णिमा के पीछे का शास्त्र पता होना चाहिए |

नारली पौर्णिमा कब आती है ?

नारली पौर्णिमा श्रावण के पौर्णिमा को याने जब वर्षा ऋतु धीरे धीरे कम हो रही हो और शरद ऋतु याने ऑक्टोबर हीट शुरू हो रही हो तब आती है |

इस ऋतु मे हमे आहार विहार मे क्या बदलाव करने चाहिए ?

वर्षा ऋतु मे जो आहार विहार बताए गए है जैसे गरम, तीखा, तला ये सब धीरे धीरे कम करने चाहिए और शरद ऋतु मे जो आहार विहार बताए है वह शुरू करने चाहिए |

तो शरद ऋतु मे क्या आहार विहार बताए है ?

यही नारली पौर्णिमा मे बताया है |

नारली पौर्णिमा मे बताया है कि शक्कर, चावल और नारियल खाना चाहिए |

क्यु ?

आयुर्वेद नुसार शरद ऋतु मे पित्तप्रकोप काल होता है |याने इस ऋतु मे पित्त बहुत ज्यादा बढता है और हमे पित्त कि सारी बीमारियाँ जैसे माइग्रेन, एसिडिटि, सिरदर्द आदि होने लगती है |

हर त्यौहार मे जो पदार्थ खाने को कहे जाते है वह प्रतिकात्मक होते है (याने इस तरह खाओ) जैसे नारियल प्रतिकात्मक है| नारियल याने सफ़ेद, मीठे, पानीयुक्त पदार्थ हमे खाने चाहिए |

इन प्रतिकात्मक पदार्थों को जरा विस्तार से जानते है ।

  • सफ़ेद पदार्थ – सफ़ेद रंग पित्त शामक याने पित्त कम करने वाला होता है | इसलिए सफ़ेद पदार्थ जैसे दूध, दूध के पदार्थ, चावल ज्यादा खाना शुरू करना चाहिए |
  • पानीयुक्त पदार्थ –ऑक्टोबर मे गर्मी के बजह से शरीर मे पानी का अंश बहुत कम हो जाता है इसलिए धीरे धीरे पानीयुक्त चीजे जैसे नारियल पानी, शर्बत, छाछ इनका सेवन हमे करना चाहिए |
  • मीठे पदार्थ – मीठे पदार्थ वात और पित्त दोनों को कम करते है इसलिए इनका सेवन शुरू करना चाहिए जैसे शक्कर ,गुड ,मीठे पक्वान्न आदि और नैसर्गिक मीठे पदार्थ याने फल | फल मीठे, खट्टे और पानीयुक्त होते है इसलिए वात और पित्त दोनों को कम करते है |

तो आज का हमारा आरोग्य मंत्र – 0६ है –

वर्षा ऋतु का तीखा, गरम, तला खाना धीरे-धीरे कम करो और शरद ऋतु का मीठा,सफ़ेद, पानीयुक्त अन्न खाना धीरे-धीरे शुरू करो |”

नारियल मे ये सभी गुण है – सफेद, मीठा, पानीयुक्त और फल भी है |

इसलिए नारली पौर्णिमा से बताया है नारियल खाओ और निरोगी रहो |

तो इस ऋतु से हर रोज अपने खाने मे हमे नारियल का सेवन अलग अलग तरह से जरूर करना चाहिए जिससे हम निरोगी रहे ।

अगले त्यौहार तक इस आरोग्य मंत्र को follow कीजिये  और हमे follow कीजिये जानने के लिए कि कृष्ण जन्माष्टमी के पीछे का आरोग्य मंत्र क्या है ?

Stay Healthy Stay Blessed  .

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Narali Pournima – Start eating Coconut to remain healthy (Health Mantra -06) Blog -36

In our past videos we learnt that if our Immunity is good we remain healthy .And to keep immunity good we must change lifestyle according to season change .

What seasonal changes should be made in diet and routine are told by Festivals.

How ?

That is discussed in our last Health mantra no – 05 video . The link of that video is given at the end of this blog.

So if we follow lifestyle changes told by festivals then we remain healthy. But those changes should not be followed only during that festival. But lifestyle changes should be imbibed from that festival till next festival.

So our todays topic is “From Naarali Pournima start eating coconut and remain healthy.

How ?

Well to understand this, we must inquire into the Science behind Narali Pournima.

When does Naarali Pournima come ?

On Pournima of Shravan, when rainy season is about to end and october heat is going to start.

So what changes we should do in lifestyle ?

We should slowly stop Varsha/rainy lifestyle of hot, spicy and fried food and change to Sharad Hritu /October heat lifestyle.

So what is Sharad Hritu /October heat lifestyle?

That is told on festival Naarali pournima.

On Naarali Pournima we are advised to eat sugar, rice and coconut.

Things advised on festivals symbolically tells us what changes to do.

Like COCONUT symbolically tells us to eat White, Sweet and things with lot of water in it as these reduces Pittah as well Vaat.

Let’s understand these symbolical language in a bit detail.

  • White  Things –  White  color is coolant. So white things reduce Pittah in the body. Therefore start consuming white things like rice, milk, milk products, coconut etc.
  • Sweet things – Sweet things decrease Vaat as well Pittah in the body. So slowly increase eating sweet foods like sugar, jaggery etc and natural sweet like Fruits. Fruits are sweet, sour as well contain water so it reduces Vaat as well Pittah .
  • Things with more water content – like butter milk, fruits, Juices, sharbat, coconut water etc as October heat is going to disturb your water balance in body.

So our Health Mantra – 06 is

“ Stop eating Rainy diet ie spicy, hot, fried and slowly start eating Summer diet ie White, Watery and Sweet.”

Coconut has all above properties. It is fruit, sweet, watery and white. So it balances Vaat as well Pittah and keeps you healthy .

So from Naarali Pournima start eating coconut everyday in diet in varied forms to remain healthy.

So start following Festival Lifestyle to remain healthy and start following us to know new Health Mantra.

Our next Health Mantra will be science behind Janmashtmi.

So till next week.

Stay Healthy, Stay Blessed .      

NAGPANCHAMI TEACHES US HEALTH MANTRA ( health mantra -05 )BLOG NO-35

Have you ever wondered if there is any role of festivals in keeping us healthy?

Like today is Nagpanchami ……so is there any SCIENCE behind diet and routine advised on Nagpanchami.

Changes in season brings about changes in our body too but we don’t make changes in diet and routine according to change in season so we fall sick.

So how will we know what changes to make in diet and routine to remain Healthy even during season change?

Therefore our ‘Hrishis’ kept festivals during season change, and they advised what diet and routine to be followed during season change as diet and routine of that Festival.

Surprised…..to know …..that there science in our culture and festivals too?

So let’s understand What diet and routine is advised on Nagpanchami?

1. Upvaas – as rainy season is still going on.

2.Don’t Cut and Fry.

3. Milk – Pittah Shamak – Kheer, halwa

Upvaas – Our digestion is governed by sun’s clock.In rainy days as sun is covered with clouds most time of day so our digestive power (agni) is weak. If we eat heavy to digest food then we tend to fall sick.So UPAVAAS is advised.

Do do not CUT and FRY– According to Ayurveda September and October is Pittah prakop Kaal means Pittah is  going to increases alot in these month. So as a prevention we are advised to slowly stop eating fried food advised in rainy season.

Milk – Milk we offer to Nagdevta which Symbolically initiates us to start consuming white things as white colour is pittah shamak ie it reduces pittah.

So all things advised on Nagpanchmi are Preventive measures againts october heat .

So our Health Mantra – 05 is

“Start eating white things, do upvaas and reduce eating fried food.”

The diet advised on one festival is not only for that day but that diet and routine should be followed from that festival till next festival.
So follow changes advised on festivals and remain HEALTHY

Stay Healthy Stay Blessed

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Dr. Mansi Kirpekar | Health Designer | Ayurvedacharya

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चातुर्मास मे छुपा है आरोग्य मंत्र (आरोग्य मंत्र – ०२) BLOG – 31

क्या आप जानते है की हमारे हर एक त्यौहार के पीछे शास्त्र छुपा है ?

चातुर्मास के पीछे भी आरोग्य मंत्र जुड़ा है |

जानना चाहेंगे कैसे ?

पुराने जमाने मे वर्णव्यवस्था नुसार कुछ वर्ण के लोगो को शास्त्र का ज्ञान था…. तो अन्य वर्ण के लोग निरोगी रहे इसलिए शास्त्र के सिद्धान्त धर्म के उपदेश के साथ बताए गए ताकि धर्म का पालन करके लोग निरोगी रहे |

तो जानते है चातुर्मास के पीछे छुपा शास्त्र |

चातुर्मास मतलब – चातु याने चार और मास याने महीने |

चातुर्मास याने बारिश के चार महीने |

चातुर्मास की शुरुवात बारिश के आने से होती है | हर राज्य मे बारिश शुरू होने की तारीखे थोड़ी आगे पीछे होती है इसलिए हर राज्य मे चातुर्मास की शुरुवात भी थोडी आगे पीछे होती है |

आयुर्वेदनुसार अपने शरीर की पचनशक्ती सूरज की शक्ती से जुड़ी होती है। तो इन चार बारिश के महीनो मे सुरज बादलो से घिरा होता है इसलिए हमारी पचनशक्ती भी बहुत कम हुई होती है | इसलिए चातुर्मास मे उपवास को महत्व है |

बारिश मे पचन शक्ती कम होने पर अगर हम खाने मे भारी पदार्थ खाये जैसे fermented products या दही ,पनीरआदि तो हम जरूर बीमार पड़ते है | इसलिए इस मौसम मे हमे सर्दी ,खांसी ,पेटदर्द ,उल्टी ,जुलाब जैसी बीमारीया अधिक होती है |

चातुर्मास में बताया गया है कि “ उपवास ” करे|उपवास करने से हमारी पचन शक्ती अच्छी रहती है |

उपवास का मतलब – कम अन्न खाये , हल्का अन्न खाये |

इसलिए शास्त्रो के नुसार धर्म ने साल के जादा से जादा उपवास इन चार महीनो मे बिठाये है ताकि हम उपवास करके निरोगी रह सके |

तो आज का हमारा आरोग्य मंत्र – ०२ है – ” चातुर्मास / बारिश के दिनों में उपवास करेऔर निरोगी रहे | ”  

अगले ब्लॉग में हम जानेंगे की “उपवास कैसे करना चाहिए ?”

तब तक स्टे हेल्धी, स्टे ब्लेस्ड |

DO YOU KNOW SCIENCE BEHIND CHATURMAAS ? (Health Mantra – 02) Blog – 30.

Do you know that there is science behind all festivals and rituals?

“Chaturmaas also has science behind it ?”

In early days ,according to “ Varna System” only Brahmins knew all the Shatra (Knowledge /Science).So to maintain health and well being of other varnya people who never read shastra…..Shatra teachings were told with Dharma and people were asked to follow Dharma.

So that all  people followed dharma and indirectly followed shatra and remained healthy.

So what is science behind Chaturmas ?

Chatu means– 4 four and Maas means – month

Chaturmas means 4 months of rainy days.

Chaturmas marks the start of rainy day. As rain starts on different dates in different states so the chaturmas dates vary in all states.

According to ayurveda, our digestion is governed by sun.In rainy days, sun most of the time is covered with clouds. So in rainy days, our digestive power is poor/ weak..

If we consume heavy to digest food or large quantity food in this season, then as digestive power is less , we tend to fall sick with cough, cold ,loose motion ,vomiting etc.

So the science behind chaurmas is

          “Do fasting in Chaturmas”

Fasting /upwas means- Eat light food , Eat less quantity food.

So it we eat light and less quantity food then our digestive power remains good and so does our health .

Therefore almost all the fasts of the year are kept by dharma in rainy days so that we follow them and indirectly follow science and thus remain healthy .

So Health Mantra no – 2 is “Do fasting in rainy days to remain healthy” .

But fasting should be done properly to avail it benefits .“ How to do fasting?” will be discussed in our next blog.

Till then keep discovering science behind rituals and festivals ….

Stay HEALTHY , Stay BLESSED.                 

मनशांती के लिए उपवास करना चाहिए ? (आरोग्य मंत्र – ०३) – Blog – 27

                     

    

घरेलु नुस्को मे हम निरोगी रहेने के अलग अलग नुस्को की जानकारी देते है |

पिछ्ले नुस्का नं ६ मे हमने जाना की “चातुर्मास मे उपवास करने से हम निरोगी राते है “

इसलिए साल के सारे उपवास इन चार महीनों मे आ जाते जैसे – आषाढ़ी एकादशी,अंगारिका चतुर्थी , श्रावण सोमवारआदि |

पर अगर हमे उपवास करने का सही तरीका पता नही हो तो उपवास करके हम निरोगी होने की जगह ज्यादा बीमार पड़ते है ?

तो आज का शुक्रवार घरेलू नुस्का नं ७ है

  “उपवास कैसे करना चाहिए ?”

पहले जानते है “उपवास का मतलब क्या है ?

उप याने – अंदर….वास याने – रहना

उपवास याने अपने “अंदर वास करो

याने अपने अंदर जो शक्ति /आत्मा /भगवान उसके अंदर आत्मचिंतन करो |

इसलिए  ऐसे  माना जाता है, भगवान विष्णुजी इन चार महिने योगनिद्रा मे चले जाते है |

इससे शास्त्र को सूचित करना है कि इन चार महीनो मे आप भी आत्मचिंतन करो |

पुराने जमानो मे बारिश के मौसम मे बाहर के काम ज्यादा नहीं होते थे |

तो घर मे बैठकर ज्यादा आत्मचिंतन करो | परघर मे बैठकर लोगो ने भारी ज्यादा अन्न खालिया तो लोग बीमार पड़ेंगे और भारी अन्न खाया तो नींद ,आलस आता है ,आत्मचिंतन नही होता |

इसलिए शास्त्र ने धर्म के नुसार बताया है की उपवास करो |

तो अच्छे से आत्मचिंतन होने लगेगा |

तो उपवास का सही उददेश है मन की शांती या आत्मचिंतन |

पर ऐसा उपवास तो हम नही करते ——–हम भीड़ मे जल्दी जल्दी मे मंदिर जाकर दर्शन करके आ जाते है —– ना मंदिर मे आत्मचिंतन करते है न घर मे नामस्मरण ——-सही मायने मे “मन शांती”के लिए उपवास करना चाहिए ?

उपवास के दिन ज्यादा से ज्यादा आत्मचिंतन मे बिताना चाहिए इससे मन शांत और निरोगी होता है शरीर भी शांत और निरोगी रहता है ?

तो अगले विडिओ मे हम जानेंगे शरीर निरोगी रखने के लिए उपवास कैसे करना चाहिए ?

तब तक के लिए —— उपवास करो और निरोगी रहो |

तेल अपनाए दर्द मिटाए | (घरेलू नुस्का नं -03) Blog. – 24

आयुर्वेद के अनुसार वर्षाऋतु मे वात बढता है और वात के साथ बढ़ते है सब तरह के दर्द जैसे घुटनो मे दर्द ,बदन मे दर्द ,पेट मे दर्द

तो वर्षाऋतु का दर्द नाशक है – तैल

  • सांधो में दर्द के साथ सुजन हो तो – उष्ण, गरम गुण वाले तैल अपनाए जैसे महाविश्वगर्भ तैल , सरसों का तैल|
  • अगर सांधो में चलते वक्त और काम करते वक्त दर्द हो और उसके साथ कमजोरी हो तो ताकत देने वाले तैल अपनाए
  • जैसे चंदनबला लाक्षादी तैल, महानारायन तैल
  • रात सोते वक्त एक या दो बूंद तैल नाभि मे डालकर , हल्के से मसाज करके सोए |

इन सबसे शरीर और सांधो का वात कम होता है |


आयुर्वेद ने वर्षा ऋतु मे आहार मे तैल का सेवन लाभदायक बताया है | तो अगर आपको ब्लडप्रेशर, कोलेस्ट्रोल या मोटापा ऐसे बीमारियां नही हो तो इस ऋतु मे तली हुई चीज खाना लाभदायक होता है | इससे वात काम होता है|

वैसे भी हमे बारिश मे तली हुई चीजे खाने की इच्छा होती है जैसे वडा पाव या फिर भजिया

तो कैसे लगा हमारा आज का नुक्सा ?
ऐसे ही और नुक्सो के लिए हमारे साथ बने रहिए…Treasures of Ayurveda पर
तब तक के लिए
Stay Healthy…. Stay Blessed

Oil – The Pain Killer of Rainy Days (Home Remedy No. – 03) Blog.- 23

Ayurveda states that, in rainy season VAAT increases and VAAT creates all kinds of pains- joint pain, body pain, pain in abdomen

So the Painkiller of rainy season is – OIL

  • So if you have pain with some kind of swelling then apply oil with warm properties like VISHGARBH OIL or Mustard oil.
  • If you have pain during walking or pain during movement with weakness then apply oil which has strengthening properties like MAHANARAYAN OIL , CHANDAN BALA TAIL .
  • Apply oil to the affected part ,do a very soft massage and then give hot fermentation.
  • Also put one drop or two drops of tail /oil in the naval area, massage little and go off to sleep.


Even consuming oil in this season is advised by ayurveda so if you’re not suffering from any major diseases like hypertension or cholesterol or obesity then oil is very good for this season.


So you can consume fried food ( anyways we get tempted to eat BHAJIS ) in this season.

So our Painkiller for the rainy season is OIL.
Hope you liked our video and stay tuned for more home remedies on our blogsite – Treasures of Ayurveda.

Stay Healthy……. Stay Blessed

Dry Ginger Powder – Healer against Rainy Diseases. (Home Remedy No. – 02) Blog.- 21

As rain is increasing so are diseases of rain especially stomach pain, joint pain and cold.
So the Home Remedy is

Dry Ginger Powder

  • So if you are having stomach pain then take Sunth powder (Dry Ginger powder) mix it with jaggery make tablets and have it before meals.
  • If you’re suffering from a lot of cold and blocked sinuses then take Sunth (Dry Ginger powder) powder in a pan, heat it and inhale the fumes through your nose.
  • If you have joint pain because the coldness of the rains then apply Dry Sunth Powder(Dry Ginger powder) to all your joints which are painting at bedtime.

So isn’t Sunth i.e. Dry ginger a wonder for rainy season.

So hope you like this tip and do keep connected with us on Treasures of Ayurveda for more home remedies.

Stay Healthy ….Stay Blessed

लहसुन – बारिश का स्वास्थ्य रक्षक ( घरेलू नुस्का नं- ०१) Blog – 19

बारिश आ गई है और बारिश के साथ बारिश की बीमारियां भी आएंगी जैसे सर्दी ,खांसी ,बुखार, पेट दर्द ,उल्टी वगैरा


तो इस मौसम का हमारा साथी है -लहसुन
” लहसुन अ डे कीप्स डॉक्टर अवे ” “Garlic a day keeps doctor away “


इस मौसम में लहसुन खाने से (क्यूंकि लहसुन को एन्टी- वायरल प्रॉपर्टीज है ) वह हमे बारिश की सारी बीमारियों से दूर रखता है |
दोपहर और रात खाने के साथ आप लहसुन की चटनी खाए तो आप बारिश की सारी बीमारियों से दूर रह सकते हो |
तो कैसा लगा हमारा नुस्का ? – बहुत आसन और उपयुक्त |

ऐसे और नुस्को के लिए के लिए “Treasures Of Ayurveda” साईट को सबस्क्राईब कीजिये |

स्टे हेल्धी….स्टे ब्लेस्ड

Preventive measures against Black fungus – Ayurveda perspective. (Blog – 18)

Seeing the cases increasing at such a tremendous speed and the complications of fungus being vision loss….It is better to take maximum preventive measures and stay safe from the disease.

As for fungus, we should understand in which environment does fungus grow faster….The answer is very simple…..Unhygienic and humid climate.

So the preventive measures would also be on same lines i.e……Hygiene and dry ventilated climate.

– Stay in well ventilated rooms

– Minimise use of Air conditioners

– Use clean masks and cloths. Avoid sharing each other’s mask, towels , pillows , handkerchiefs etc.

– Disinfect intimate clothing with dettol , dry them properly or iron them.

Ayurvedic Perspective –

1) Ayurveda says that for any disease to happen the balance in Panchamahabhutas I.e. earth (pruthvi), water (jal) , fire (tej), air (vaayu) ,and space (aakash) should be disturbed.

So according to ayurveda, if water is favouring the growth of fungus then eatables and environment having more water should be avoided.

2) Ayurveda states that as fungus grows fast on things which become stale fast, spoil fast….So such things should be avoided. On other hand, the things which when kept at room temperature doesn’t spoil fast have good potency in them like awla, honey etc

So it’s easy to make list of eatables-

– Most important according to ayurveda is AVOID MILK AND MILK PRODUCTS COMPLETELY.

-Avoid fermented products and products which spoil very fast when kept at room temperature like bakery products like bread, cake

– Prefer dry, roasted things like chapati to rice, pops to gravies.

-Prefer spicy things to sweet things.

-Prefer soups to cold drinks

And MOST IMPORTANTLY keep IMMUNITY high by following healthy lifestyle that is early to bed early to rise, eat on time and MOST IMPORTANT EXERCISE.

Sweating after exercise improves skin circulation ,opens pore and helps in proper excretion of dirt through sweat also helps maintain body temperature…But taking a proper bath after exercise is equally important…And proper drying after bath.

DANTAMANJAN- After brushing teeth….Apply DANTAMANJAN POWDER to gums, teeth and tongue….Keep it for 4 mins and then wash off with warm water.

DHUMPAAN – that is taking medicated fumes of triphala powder to nose and mouth.(not steam…No water…Burn the powder on pan)

UDAVARTAN -Apply dry medicated powder or triphala powder (utane/ubatan) to skin after bath.

TRIPHALA is very good for skin so 1 teaspoon triphala powder on empty stomach in the morning keeps bowel, digestion, skin healthy and immunity high.

And last but not the least as it is a communicable disease

MAINTAIN SOCIAL DISTANCING.

For more informative blogs subscribe treasures of ayurveda

@drmansikirpekar

Health Mantra watch our health videos on link- https://youtu.be/quy94K51uPs

U tube channel – Aarogyam Ayurvedic Clinic

SURVIVAL OF THE FITTEST. (Blog – 17)

Dr. Mansi Kirpekar, Ayurvedacharya

Seeing present health conditions we are reminded of the basic law of ecosystem…..Survival of the fittest.

Human being are also a part of ecosystem so the law applies to us too.
A species of ecosystem…virus…is attacking human species….so to survive we must be THE FITTEST of the two.

So the answer to this pandemic is….Survival of fittest.

So we should be physically and most important MENTALLY at our fittest to survive.

The virus is following the rules of ecosystem…it is changing its strains…to become stronger and survive.

Then we should also be ready to CHANGE and become stronger to survive.

Changing to Physical and mental fitness is answer for survival.

Physical fitness is simple but mental fitness is challenging.

Achieving Physical fitness-

  • Early to bed early to rise…6 am…basic law of ecosystem keeps your body clock perfect
  • Exercising in the morning helps boost the circulation to all systems and remove out toxins
  • Eat healthy, fresh food, avoid food with preservatives….the more you are with the nature, the more it helps you survive.
  • Follow sun clock, 8am breakfast , 12 noon lunch and dinner before sunset. Sun gives energy for whole ecosystem to survive. Our digestion is governed by sun’s clock too. So follow sunclock.
  • Eat LIGHT dinners as sun’s energy is not there to help in our digestion plus with lockdown our life has become alot sedentary.
  • Eat FRESH fruits and dryfruits for breakfast.
  • Eat Fibre and protein rich meals. Take 200 gms salads for lunch and dinner….fibres keep your bowel movements proper.
  • Don’t eat STALE food….if you don’t want to waste food then cook less and eat less than eating stale food. Stale food has lost all its nutrients plus it has no biopower left so its heavy to digest.

Mind rules the body. So mind fitness is more important. Mind keeps your appetite and immunity high.

CHANGES for Mental fitness-

Most important is don’t fear the name. If your test comes positive….don’t panic…its just a FLU….in a war you can’t be weakened by the name of the enemy.

  • If you fear…your appetite becomes less and indirectly your immunity goes down …so instead TAKE REST AND EAT HEALTHY FOOD.
    Rest and food is going to help your body build immunity and win the war.
  • Take help of NATURE…i.e. our age old science AYURVEDA…to fight the virus and boost immunity.
  • Do meditation of any form you believe in….as believes and meditation strengthens your mind…and a strong mind wins battles.
  • Spend some time in a hobby ….as hobby soothens your heart…keeps it happy and healthy.
  • Dont quarrel at home….spend happy time with family…it boost all immune systems. Happiness is the ultimate weapon.

So let’s follow laws of ecosystem….
CHANGE FOR SURVIVAL

Let’s CHANGE to become physically and mentally FITTEST.
and win against the virus.

Aarogyam ayurvedic clinic
09833032373
022-28281002
Borivali,Mumbai
INDIA
https://www.aarogyamayurvedicclinic.com

YouTube- Dr.Mansi’s Aarogyam ayurvedic clinic

#blackfungus #immunity #ayurveda

PANCHAKARMA IS SAME AS DOPAMINE DETOX WITH ADDED BENEFIT OF BODY PURIFICATION. (Blog – 10)

Recently heard alot about ” Dopamin detox” as how abstinence from desire and devices will lead to setting mind in balance, refreshed and rejuvenated. So being an Ayurveda practitioner i wanted to bring Ayurveda perspective into light about this.

Ages before our hrishis knew that controlling senses can lead to great health benefits so they added many scientific ideas of keeping health to our tradition and named them as DHARMA. Dharma litterally means a person’s riteous duty towards his body , mind, family and society.

Many concepts of once a day fasting, once a month fasting , shravan fasting (one month fasting) , chaaturmaas ( four month fasting) were started with an idea of mind and body detox. So you stay away from food and desires and spend time in temple. Temple was a place outside the village, away from everyone, with peace, cool envirnment inside to spend the day in devine thoughts.

But when you are ill or due to irregular routines , stress ….. body accumulates toxins inside so in such a situation only fasting will not help…….so our rishis formulated PANCHAKARMA. In panchakarma you achieve mind as well as body detox.

In panchakarma, you stay in isolated places near to nature in clean clear environment, away from devices so mind detox is achieved. For 15 days you are served only health food and only in the amount required for surviving so your body detox starts.

How PANCHAKARMA works?

In PANCHAKARMA, your digestive system is used for purification….suppose a machine is to be put on for purification mode then its basic function should be stopped…..in same ways….if your digestive system is to be used for purification…then its everyday eating should be minimised to eating only that much food which is required to survive….then only our digestive system will get time to remove out toxins.

In first 15 days (purification part of Panchakarma) , basic food is given, medicinal ghee is given in large amount which will work for removing toxins from body. Patients is asked to follow abstinence and no desires and devices. Anything which increases your food requirement is also avoided like even exercise is avoided.

In next 15 days ( strengthening part of Panchakarma), you are given healthy diet and taught all forms of yoga and meditation and medicated ghee for strengthening body is given….this is called RASAYAN which increases your body and mind strength and vigour.

So Panchakarma proves to be benefiting a person with dopamin detox as well body purification and strengthening

Stay health, Stay happy, Stay Blessed.

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HOW TO KEEP IMMUNITY HIGH ? (Blog – 07)

For that we should have some knowledge (not information) about basic principles of Ayurveda so that we could make correct choices.

Present era is of information and marketing , so much of information is present on net that we can’t differentiate what is correct and what is wrong especially about AYURVEDA and herbal.

Universe is made up of five basic elements called PANCH- MAHABHUTAS . Earth ( Pruthvi), Water ( Jal), Fire ( Tej) , Air ( Vaayu) and Space ( Aakash).

BALANCE in these Mahabhutas maintain Nature. But imbalance in these Mahabhutas lead to natural calamities like earthquake, cyclone etc. Nature tries to maintain this balance by making changes to restore balance in mahabhutas. For example- In summer season HEAT increases, when heat increases alot by the end of season, then nature pours down water and the season changes to rainy season and nature thus maintains its balance.

On same principles, our body is also made up of these basic five elements. Balance in these mahabhutas is HEALTH. And imbalance in these mahabhutas causes DISEASE. Our rishis studied what impact these changes in nature has on our body , and advised a set of SEASONAL changes in diet and routine called as HRITUCHARYA following which we could keep mahabhutas in our body in balance and enjoy Health.

NATURE changes itself to maintain balance in mahabhutas . So with change in nature, if we will follow the changes advised by our rishis i.e. HRITUCHARYA , then we too will be able to maintain balance in mahabhutas in our body and thus remain HEALTHY.

IMMUNITY is nothing but remaining HEALTHY. So this HRITUCHARYA can be coined in today’s term as immunity. Immunity can’t be just a tablet or kadha which will keep you healthy, it has to be a full diet and lifestyle guideline according to seasonal change.

AYURVEDA is a science and it brings immense joy and respect towards those enlightened rishis who have framed so much detailed health design for us. Its our ignorence that we don’t follow their advices and keep on running after shortcuts and inviting dozens of disease.

NATURE also helps us in all possible ways to maintain health. It provide us with those fruits and vegetables which will help maintain balance / health in that season. For example- in summer season, there is alot of heat in environment, water is lost through perspiration…..so nature provides us with all juicy , pulpy fruits in this season .In rainy season, appetite is less and there is alot water in nature so nature stops providing fruits. So health can’t be achieved by eating everything in all seasons ( as now a days , everything , is grown forcibly and made available in all seasons)…..but health is achieved by changing according to season and accepting what is provided by nature in that season.

Such are the wonders of NATURE and AYURVEDA , who are providing everything to keep us healthy. But we run after advertisements , shortcuts and some magic immunity pills.

So immunity is following HRITUCHARYA and eating seasonal food.

Now you know, immunity boosters can’t be same for all seasons. LIFE IS CHANGE .So if we too keep changing our lifestyle in tune with nature……immunity will be high always.

I hope you could gather a wider perspective about looking at immnity from this article. And this knowledge will help you in making correct choices.

I will write down in detail about these HRITUCHARYAS told by ayurveda in my coming blogs soon.

Stay Healthy, Stay Happy, Stay blessed

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HOW YOGA HELPS ONE TO MAINTAIN HEALTH? (Blog – 05)

HAAPY YOGA DAY

Einstein said “Energy cannot be created or destroyed, it can only be changed from one form to another..

Our consciousness is a form of energy where some part of life energy turnes in to a matter called body..

But that’s hardly 1/8th visible part of our consciousness.. Rest four parts- heart, mind, intellect and spirit remain in energy form supporting body and forming a synchronization and Harmony within.

Our Day today chores and disturbances causes imbalances in synchronization of Harmony of life energy ..

The yoga postures have been so designed that .. when you are in those particular postures for a few minutes …. the energy is pulled back to it’s original space and synchronization and harmony of life energy is restored and thus HEALTH is maintained everyday.

Thus,Yoga helps one to understand how life energy dissipates and how it can be synchronized back and used beautifully to maintain HEALTH.

So my tag line is – ” Do Yoga and live with a flowering life energy always inside you..”

Watch our video MY LIFE MY YOGA on following link

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